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Chandigarh Chandigarh पटियाला . लगातार विवादों में घिरे रहे पंजाबी यूनिवर्सिटी के कुलपति स्वर्ण सिंह बोपाराय ने आखिर इस्तीफा दे ही दिया। यह इस्तीफा 30 नवंबर से लागू माना जाएगा। अभी तक वीसी यही कहते रहे हैं कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन मंगलवार को उन्होंने खुद मान लिया कि उन्होंने पिछले रविवार को ही इस्तीफा दे दिया था। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि बोपाराय को रानीतिक दबाव के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। मैं आवाज उठाऊंगा।
कुछ दिन से चल रही थीं चर्चाएं मालूम हो कि पंजाबी यूनिवर्सिटी में पिछले कुछ दिनों से कुलपति बोपाराय के इस्तीफे को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। मंगलवार को वीसी ने पीयू के उच्चधिकारियों के साथ बैठक में कबूल किया कि उन्होंने इस्तीफा भेज दिया है। इसमें 30 नवंबर के बाद अपना पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की है। इस बात की सूचना पाते ही पंजाबी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार बलदेव सिंह संधू, यूथ वैलल्ेयर विभाग की डीन सुनीता धीर, वीसी के ओएसडी टी.ए सरमा, एनएसएस के डायरैक्टर ए.एस चावला, म्यूजिक विभाग के कोऑर्डिनेटर यशपाल शर्मा ने भी अपने इन पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि बतौर टीचर वह अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
कब शुरू हुआ था विवाद स्वर्ण सिंह बोपाराय को अगस्त 2002 में कांग्रेस सरकार ने पंजाबी यूनिवर्सिटी में बतौर वीसी लगाया था। हालांकि उनका कार्यकाल 2005 में समाप्त हो गया था, इसके बाद भी सरकार ने उन्हें एक और टर्म के लिए नियुक्त कर दिया। इसके बाद वीसी अपना कार्यकाल चलाते रहे। अकाली सरकार आने के बाद ही वीसी के खिलाफ आवाज बुलंद होनी शुरू हो गई। पंजाबी यूनिवर्सिटी में लंबे समय से शांत रहे स्टूडेंट्स व टीचरों ने उनकी खिलाफत शुरू कर दी। दो टीचर मनजीत सिंह व कुलबीर सिंह ढिल्लो सस्पैंड हुए।
इसके बाद पीयू में एक ज्वाइंट एक्शन कमेटी का गठन हुआ। इसके बाद तैयार हुआ वीसी के खिलाफ खाका। वीसी के खिलाफ करीब 100 पन्नों की एक रिपोर्ट बनाकर विजिलैंस को भेजी गई थी। विजिलैंस का काम शुरू हुआ। इस बीच रजिस्ट्रार को भी विजिलैंस ने एक कालेज से रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा। विजिलैंस का शिकंजा वीसी पर भी कड़ा हुआ। खुद वीसी ने भी इस बात को स्वीकार किया कि विजिलैंस ने उनपर कड़ाई की है। इस बीच वीसी के इस्तीफे की कुछ बातें निकलीं। इसे वीसी ने अफवाह करार दिया। आखिर इन बातों को वीसी ने मंगलवार को स्वीकार कर लिया।
सरकार के साथ ही बदलते रहे हैं वीसी पंजाबी यूनिवर्सिटी का इतिहास ही यह रहा है कि यहां के वीसी सरकार बदलने के साथ विवादों में घिर जाते हैं। स्थिति यह बनती है कि उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ता है। बोपाराय से पहले जसबीर सिंह आहलूवालिया को भी विवादों के बीच अपना पद छोड़ना पड़ा था। उन पर एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला उठा था। मामला इतना भड़का था कि उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था।
आहलूवालिया को अकाली सरकार ने लगाया था। जबकि उन्हें कांग्रेस सरकार के समय में अपना पद छोड़ना पड़ा था। उनसे पहले जोगिंद्र सिंह पवार ने हालांकि अपनी टर्म पूरी की थी, लेकिन उनपर भी अपना पद छोड़ने का दबाव बना था। उनके खिलाफ वित्तीय अनियमित्ताओं के आरोप भी लगे। इससे पहले भी डॉ. भगत सिंह के साथ ऐसा ही हुआ था। उन्हें तो पद से हटा भी दिया गया था। हालांकि वो कोर्ट में दस्तक देने के बाद अपने पद पर दोबारा लौटे थे।
हां, मैं अभी तक इसलिए इस्तीफे के मामले में मना करता रहा हूं क्योंकि मैं चाहता था कि इस विषय पर सरकार खुद ही कुछ कहे
-स्वर्ण सिंह बोपाराए, वीसी पीयू