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मेड़तासिटी. मेड़ता अदालत ने एक नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ मंदिर में बलात्कार करने पर बोरुंदा निवासी शेख मोहम्मद को सात वर्ष के कारावास व 17 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व 15 जून 2006 को शेख मोहम्मद उर्फ शेखिया पुत्र दिलदार खां एक नाबालिग लड़की को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाकर बोरुंदा क्षेत्र के जंगलों में ले गया। वहां स्थित गणोश मंदिर में उसे चाकू दिखा डरा धमका कर बलात्कार किया। दो दिन बाद किशोरी घर लौटी, तब उसने पिता को घटना की जानकारी दी।
पिता ने इस मामले में 17 जून 2006 को गोटन पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कराया। गोटन पुलिस ने पीड़िता के धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज करवाए। अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के तहत बलात्कार का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।
गोटन पुलिस ने मामले की जांच कर 11 अगस्त 2006 को मेड़ता के विशिष्ट न्यायालय में चालान पेश किया। यहां पर न्यायाधीश वीके माथुर ने दोनों पक्षों के कुल 23 गवाहों के बयान दर्ज किए। दोनों पक्षों के बयान सुनने के बाद न्यायाधीश ने शेख मोहम्मद को अनुसूचति जाति जन जाति अधिनियम के तहत तीन वर्ष व नाबालिग बालिका के साथ बलात्कार करने पर सात वर्ष की सजा के अलावा 17 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।