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जोधपुर. डा. एसएन मेडिकल कॉलेज से जुड़े शहर के तीन बड़े अस्पतालों में आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से मरीज दिन भर एक अस्पताल से दूसरे
के चक्कर लगाते रहे हैं। इन मरीजों को अस्पताल में यह नहीं बताया जाता है कि जिस जांच का शुल्क जमा करवाया गया है वह कहां पर व कब की जाएगी। जानकारी के अभाव में शहरी व देहात से आने वाले मरीज थक हार कर निजी जांच केंद्रों में कई गुना अधिक शुल्क देकर लुटते हैं।
महात्मा गांधी, मथुरादास माथुर और उम्मेद अस्पताल में सेंट्रल लैब, माइक्रोबायलॉजी लैब, बायोकेमेस्ट्री लैब में खांसी, विभिन्न प्रकार के संक्रमण, एलीजा संबंधित और खून में एचआईवी तक की जांच सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पतालों में जो जांच सुविधा उपलब्ध नहीं है उसका शुल्क भी जमा कर दिया जाता है और फिर मरीज को बिना कोई जानकारी दिए छोड़ देते है। जानकारी के अभाव में मरीज दिन भर इधर उधर चक्कर काटता है और आखिर निजी लैब में जांच करवाने को मजबूर होता है।
जांच के लिए भटकते मरीज
एचबी 1 एसी: डायबिटीज के मरीज के लिए आवश्यक जांच। एमडीएम अस्पताल में जांच सुविधा है, मगर किट नहीं होने से मरीज को मेडिकल कालेज भेज दिया जाता है। एमजीएच में यह जांच सुविधा ही नहीं है। मेडिकल कालेज में केवल बारह बजे तक ही सेंपल लेते है। ऐसे में मरीज को सेंपल के लिए दूसरे दिन फिर जाना पड़ता है। एक ही जांच के लिए मरीज के दो दिन खराब हो जाते है।
सीपीके एमबी: हार्ट के मरीजों के लिए आवश्यक जांच, जो हार्ट अटैक होते ही करनी आवश्यक है। विडंबना यह है कि कैथ लैब एमडीएम अस्पताल में है और कार्डियोलॉजी यूनिट भी वहीं विकसित हो रही है, मगर इस जांच की सुविधा एमजीएच में ही उपलब्ध है। ऐसे में एमडीएम अस्पताल आए मरीज को जांच के लिए एमजीएच जाना पड़ता है।
बैक अलर्ट थ्री डी: सैफटिशिमिया मरीजों के लिए आवश्यक जांच है। इसमें रक्त और सिर में जमा होने वाले पानी की जांच की जाती है। यह जांच सुविधा केवल एमडीएम अस्पताल में ही उपलब्ध है। जबकि उम्मेद और एमजीएच में भी भारी संख्या में इस जांच के लिए मरीज आते है मगर वहां पर सैंपल लेने की सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को एमडीएम अस्पताल आना पड़ता है।
एएफबी स्पुट जांच: मरीज को खांसी आने पर थूक की जांच करवानी पड़ती है। इसमें मरीज को टीबी या खांसी के अन्य कारणों के बारे में बताया जाता है। एमडीएम और एमजीएच में प्रतिदिन चालीस से पचास मरीज ऐसे आ जाते हैं जिनको इस जांच की आवश्यकता पड़ती है।
एन एरोबिक जांच: इलाज के बावजूद जब मरीज की सेहत में सुधार नहीं आता है तब इस जांच से मरीज के शरीर में होने वाले संक्रमण का पता लगाया जाता है। इस जांच के आधार पर मरीज का उपचार किया जाता है। मेडिकल कॉलेज से जुड़े तीनों अस्पतालों में प्रतिदिन साठ से सत्तर मरीज ऐसे आते हैं, जिनको इस प्रकार के जांच आवश्यकता होती है।
ओटीपीटी टेस्ट: पीलिया सहित लीवर में खराबी होने पर इस जांच की आवश्यकता पड़ती है। इसमें मरीज के यकृत और लीवर में कोई संक्रमण होता है तो भी पता चल जाता है साथ ही यूरोलॉजी के लिए भी यह जांच की जाती है। यूरोलॉजी विभाग एमडीएम अस्पताल में है मगर जांच सुविधा एमजीएच में है।
टी3, टी4, टीएसएच: यह थायराइड से संबंधित जांच है। मरीज का स्वस्थ नहीं होना या दुबला पतला होना जैसे लक्षण पाए जाने पर इस जांच की आवश्यकता पड़ती है। प्रतिदिन दस से पंद्रह मरीजों को इस जांच की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल इस जांच के लिए मरीज को पंद्रह दिन का इंतजार करना पड़ रहा है।
टोर्च टेस्ट: शरीर में संक्रमण फैल जाने पर इस जांच की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल इस जांच के लिए उम्मेद अस्पताल में मरीजों की अधिकता रहती है, मगर वहां पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
* जांच सुविधा के सेंट्रलाइजेशन के कारण ऐसा हो रहा है। कई जांच इतनी महंगी है कि उनके लिए सभी अस्पतालों में अलग अलग किट देना संभव नहीं है। ऐसे में एक स्थान पर जांच की सुविधा दी जाती है।
—डा. पीके गुप्ता प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।