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जोधपुर. उत्तर-पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल का नेटवर्क बुरी तरह लड़खड़ा गया है। बीते छह माह से एक भी ट्रेन न तो समय पर आई है और न ही जा पाई है।
यही नहीं, आठ माह के दौरान 74 ट्रेनों के इंजन हांफे और 15 मर्तबा इंजन में आग लगी। अकेले नवंबर महीने में ही पांच बार इंजन से लपटें निकल चुकी हैं।
जोधपुर मंडल में सवारी व मालगाड़ियों के इंजनों के बीच रास्ते में हांफने का सिलसिला दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। रेलवे प्रशासन भी कमाई के चक्कर में यात्रियों के दुख-दर्द को भूलता जा रहा है। रेलगाड़ियों के ब्रेकडाउन से यात्रियों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। स्थिति इतनी विकट है कि हर माह कम से कम 9 इंजन हांफकर रुक रहे हैं। ऐसे में जोधपुर मंडल की आधा दर्जन महत्वपूर्ण ट्रेनें पिछले छह माह से घंटों विलंब से आ-जा रही हैं। रेलवे इन मामलों को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहा है।
रेलवे अधिकारी इंजन के हांफने के पीछे होलिंग कैपेसिटी कम होने और शक्तिशाली इंजन लगाने की बात कह रहे हैं, जबकि हकीकत इसके एकदम उलट है। जानकारों का कहना है कि क्षमता से अधिक माल भरने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने से ही ऐसे मामलों में कमी संभव है।
* तकनीकी खामियों के कारण इंजन के हांफने या फिर आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं। इंजन खराब होने वाली सभी ट्रेनें हमारे जोन की नहीं हैं। इनमें अन्य जोन की ट्रेनों के इंजन भी शामिल हैं। सुधार एकदम से होना संभव नहीं है। रेलवे अपनी टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर रहा है। —अशोक कुमार गुप्ता, महाप्रबंधक, उत्तर पश्चिम रेलवे
‘इंजन’ की दर्दभरी दास्तान
* 27 नवंबर : जालसू-डेगाना के बीच इंटरसिटी एक्सप्रेस के इंजन का केटल गार्ड टूटा। एक घंटे रेल यातायात ठप।
* 26 नवंबर : फलोदी आउटर सिग्नल से गुजर रही मालगाड़ी के इंजन में आग लगी। रेलकर्मियों की तत्परता से हादसा टला।
* 19 नवंबर : जोधपुर-मेड़ता रेलखंड के आसारानाडा रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी के इंजन में आग लगी। एक लोको पायलट घायल, दूसरा झुलसा।
दो यात्री ट्रेनें प्रभावित
* 6 अक्टूबर : पलाना स्टेशन पर खड़ी जम्मूतवी एक्सप्रेस के इंजन में आग लगी। यातायात ठप, कई यात्री टेनें लेट।
* 29 अक्टूबर : ओसियां स्टेशन पर ब्रेक रिलीज नहीं होने से मालगाड़ी दो भागों में बंटी। दो घंटे यातायात ठप। दो यात्री ट्रेनें देरी से चलीं।
इंजन का कैटल गार्ड टूटा, हादसा टला
जोधपुर/मेड़तारोड.
डेगाना के पास मंगलवार को जोधपुर से इंदौर जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस के आगे एक भैंस के आने से इंजन का कैटल गार्ड टूट गया और इंजन बीच रास्ते में ही हांफ गया। बाद में लोको पायलट इंजन को धीमी गति से चलाकर डेगाना तक लेकर पहुंचा। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद साधारण यात्री ट्रेन का इंजन लगाकर इंटरसिटी को रवाना किया
इंटरसिटी सुबह साढ़े आठ बजे मेड़तारोड से जयपुर की ओर रवाना हुई थी। यह ट्रेन जालसू से रनिंग थ्रू निकलकर डेगाना पहुंचने ही वाली थी कि एक भैंस ट्रेन की चपेट में आ गई।
उधर, डेगाना रेलवे स्टेशन पर हिसार-सूरतगढ़ एक्सप्रेस का इंजन हटाकर इंटरसिटी में लगाया गया। इससे हिसार-सूरतगढ़ ट्रेन दो घंटे विलंब से चली और ट्रेन मेड़तारोड दोपहर साढ़े बारह बजे पहुंच पाई। ट्रेन के विलंब से पहुंचने के कारण मेड़ता रोड से जोगीमगरा, उमेद, खारियां खंगार, पीपाड़, साथीनरोड़, आसानाडा, बनाड़ की यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हुई। गोटन व जोधपुर जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क चुकाकर रणकपुर एक्सप्रेस का टिकट लेना पड़ा।