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उदयपुर. चार साल में तीन बच्चे, पोषक आहार की कमी, स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही और आंखों की रोशनी कम होने के बाद भी उपचार नहीं करवाने की वजह से
24 वर्षीय नवीबाई गर्भावस्था में ही अंधेपन की शिकार हो गई। नेत्र ज्योति चली जाने से प्रसव के बाद वह अपनी नवजात बच्ची को नहीं देख पाई है। देखभाल के अभाव में नवजात के नेत्रों में भी गंभीर इन्फेक्शन हो गया। प्रसव के चार महीने बाद डॉक्टरों ने नवीबाई का इलाज शुरू किया है, जिससे उसकी आंखों की रोशनी फिर से लौटने की आस बंधी है।
मामला अलखनयन मंदिर में मोतियाबिंद की सर्जरी करवाने आई पानरवा (झाड़ोल) निवासी नवीबाई पत्नी बदाजी गरासिया का है। नवीबाई के दो बच्चे पहले से हैं। कम अवधि में अधिक संतान पैदा करने से उसके शरीर में खून की कमी हो गई। कुपोषण और लापरवाही के चलते उसकी आंखों में मोतियांिबंद हो गया। शरीर के प्रति लापरवाही बरतने से चार महीने की गर्भावस्था में ही उसे दिखना बंद हो गया था। प्रसव के बाद वह अभी तक मासूम बच्ची को देख भी नहीं पाई है। अलख नयन मंदिर की ओर से झाड़ोल में लगाए गए नेत्र रोग परीक्षण शिविर में नवीबाई चिकित्सकों के संपर्क में आई तो समझाइश पर उसे उदयपुर में ऑपरेशन के लिए बुलाया गया।
अंधा होने का खतरा
नवीबाई की दोनों आंखें मोतियाबिंद की शिकार हो गई थीं। उसकी सर्जरी करने वाले डॉ.एल.एस.झाला ने बताया कि सोमवार को एक आंख का ऑपरेशन किया गया। एक दिन बाद दूसरी आंख का ऑपरेशन होगा। फेको इमलसीफिकेशन तकनीक से बिना चीरे का आपरेशन किया गया। आंखों में मोतिया इतना फैल चुका था कि अगर कुछ दिन और देर होती तो आंखें गल जातीं।
डॉ.झाला ने बताया कि आदिवासी इलाकों में महिलाएं गरीबी की वजह से उपचार नहीं करवातीं। नवीबाई की नवजात बच्ची भी आंखों के इन्फेक्शन से पीड़ित हो गई।