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नई दिल्ली.पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने नई पेंशन योजना के कोष से शेयर बाजार में निवेश का रास्ता साफ करते हुए एसबीआई, यूटीआई और एलआईसी को फंड मैनेजर नियुक्त किया है। शुरू में इससे तीन लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
उन्हें पेंशन फंड में अपनी बचत पर वर्तमान 8 फीसदी के बजाय सालाना 20 फीसदी तक ब्याज मिल सकता है। पीएफआरडीए अध्यक्ष डी स्वरूप ने बताया, ‘हमने राष्ट्रीय प्रतिभूति डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) को एक जनवरी 2004 के बाद भर्ती हुए सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अभिलेख संरक्षक एजेंसी नियुक्त किया है।’ उम्मीद है कि सरकार जून तक फंड मैनेजरों को 20 अरब से ज्यादा के फंड का हस्तांतरण कर देगी और नई व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
पेंशन खातों की राशि का निवेश करने के लिए दो विकल्प हैं। खाताधारक अपने धन को सरकारी बांड और प्रतिभूतियों में या फिर गैर-सरकारी भविष्य निधि में निवेश कर सकेंगे। स्वरूप ने बताया कि कर्मचारी के नौकरी बदलने या फिर स्थानांतरण का पेंशन खाते पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
स्वरूप ने कहा कि अंतरिम व्यवस्था पर सहमत होने वाले सभी 19 राज्य भी शीघ्र नई पेंशन योजना में शामिल हो जाएंगे। केवल वाम दल शासित पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा ने योजना में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
10 फीसदी अंशदान :
नई पेंशन योजना के तहत एक अप्रैल 2004 के बाद नौकरी पाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पेंशन के लिए अपने वेतन की 10 प्रतिशत राशि देनी होगी। इतनी ही राशि सरकार अपने पास से मिलाएगी। इस योजना के दायरे में केंद्र सरकार के करीब तीन लाख कर्मचारी आते हैं, जो जून 2008 तक बढ़कर चार लाख होने का अनुमान है।
योजना में विलंब से कर्मचारियों को भारी नुकसान :
संसद में 2005 से लंबित पड़ा पेंशन विधेयक यदि उसी समय पारित हो गया होता कर्मचारियों को पेंशन की बचत पर 6 से 21 फीसदी अतिरिक्त ब्याज मिल जाता। मार्च 2005 में शेयर बाजार सूचकांक 5500 था, जो अब 20 हजार तक पहुंच गया है। पीएफआरडीए अध्यक्ष डी स्वरूप ने बताया कि नई पेंशन योजना के तहत तब शेयर बाजार में 10, 30 और 50 फीसदी निवेश के तीन विकल्प दिए जाने थे।
इसमें से अधिकतम निवेश विकल्प पर कर्मचारी को 29 फीसदी तो न्यूनतम विकल्प के लिए कम से कम 14 फीसदी ब्याज मिलता। इस अवधि में यूटीआई रिटायरमेंट पेंशन फंड व अन्य फंडों ने सालाना 20 फीसदी से ज्यादा प्रतिफल दिया।
केंद्र उठाएगा पेंशन खातों का खर्चनई पेंशन व्यवस्था के तहत आने वाले चार लाख कर्मचारियों के पेंशन खातों के हिसाब-किताब का खर्च केंद्र सरकार खुद उठाएगी। पेंशन खाते को खोलने के लिए 50 रुपए का खर्च आएगा, वार्षिक शुल्क के तौर पर 350 रु. और प्रत्येक लेन-देन के लिए 10 रुपए लिए जाएंगे। एनएसडीएल को जानकारियां रखने के एवज में हर साल 10 लाख रुपए देने होंगे। राज्य कर्मचारियों के बारे में अभी यह तय नहीं है कि उनकेलेखे-जोखे का खर्च राज्य सरकारें उठाएंगी या नहीं।