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छोटे व्यापारियों, तेल निर्माताओं को राहत

भोपाल. राज्य सरकार सोयाबीन समेत अन्य सभी तिलहनों की खरीद-फरोख्त पर लगने वाले चार फीसदी पहले बिंदु वैट वसूलने की व्यवस्था को बदलने जा रही है। इससे सरकार को सालाना 100 करोड़ रुपए से अधिक की आय होगी। साथ ही सोयाबीन प्लांट्स को इनपुट टैक्स रिबेट क्लेम चुकाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। इसके तहत अब किसान से सोयाबीन खरीदने वाले को चार फीसदी की दर से परचेज टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा और इसके बदले न तो यह राशि वह अगले व्यापारी से वसूलेगा।

वैट की इस व्यवस्था को नकद के बजाय टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (टीडीएस) के माध्यम से रेगुलेट किया जाएगा। इस बदलाव से व्यापारियों और तेल निर्माताओं को व्यवसाय करने में आसानी हो जाएगी।

नई व्यवस्था को लागू
करने के लिए मप्र वैट संशोधन विधेयक अधिनियम 2007 बुधवार को डंपर कांड पर विधानसभा में हुए शोरगुल के बीच पारित हो गया। मौजूदा व्यवस्था बदलने के लिए वैट अधिनियम की धारा 24 में संशोधन किया गया है।

वर्तमान व्यवस्था-प्रदेश में एक अप्रैल 2006 से वैट लागू होने के कारण सोयाबीन तथा अन्य तिलहनों के लिए पहले बिंदु पर वैट लगाया गया है। बाद में यह भार तेल निर्माताओं पर आता है। सोयाबीन का उपयोग प्रदेश में लगे सोयाबीन प्लांट खाद्य तेल बनाने के लिए करते हैं। कच्चे माल के रूप में वे सोयाबीन की खरीदी वैट चुकाकर करते हैं। कच्चे माल पर देय टैक्स और उससे बनने वाले तेल पर मिलने वाले टैक्स को मिलाकर तेल निर्माताओं को इनपुट टैक्स रिबेट दिया जाता है।

नई व्यवस्था-अब किसान से सोयाबीन खरीदने पर व्यापारी को चार फीसदी वैट नहीं चुकाना होगा। आगे जिस व्यापारी को वह सोयाबीन बेचेगा,उसपर वह वैट चुकाने के बदले टीडीएस प्रमाण पत्र के माध्यम से ट्रांसफर करेगा। जब सोयाबीन प्लांट्स तक पहुंचेगा तो वैट चुकाने का भार निर्माता पर आएगा,लेकिन इसके बदले वह व्यापारी को चार फीसदी टीडीएस काटने का प्रमाण पत्र देगा। फिर खरीदी गई सोयाबीन से तैयार तेल बेचने पर प्राप्त वैट और खरीदी गई सोयाबीन पर देय वैट को मिलाकर जो राशि निर्माताओं को मिलेगी,उसे इनपुट टैक्स रिबेट के रूप में मान्य किया जाएगा।

कैसे मिलता है टैक्स रिबेट-सोयाबीन प्लांट संचालकों को सोयाबीन पर मिलने वाले वैट में से तेल पर देय वैट की राशि कम करने के बाद बाकी राशि इनपुट टैक्स रिबेट के रूप में वापस मिल जाती है। अधिकांश सोयाबीन प्लांट्स में खाद्य तेल पर देय वैट की राशि का समायोजन किया जाता है,इसके बावजूद इनपुट टैक्स रिबेट की काफी बढ़ी राशि की वापसी कैरीफारवर्ड के रूप में क्लेम की जाती है।

किसे क्या फायदा
* नई व्यवस्था से सरकार के साथ ही व्यापारियों और सोयाबीन तेल निर्माताओं को सीधा लाभ होगा। मौजूदा व्यवस्था बेहद पेचीदा होने के साथ ही सरकार,व्यापारियों और प्लांट वालों के लिए भी कष्टदायी थी,इससे व्यापारियों को हिसाब-किताब रखने और प्लांटस वालों को इनपुट टैक्स रिबेट लेने में काफी दिक्कत आती थी। बिचौलिये व्यापारी फर्जी फर्म के नाम से खरीद-फरोख्त करते थे,जिनसे सरकार को वैट नहीं मिलता था। आमतौर पर दो साल बाद राशि वापस मिलती थी।

छोटे व्यापारियों और तेल निर्माताओं को सहूलियत होगी। आगे इनपुट टैक्स रिबेट के क्लेम नहीं किए जा सकेंगे। कर अपवंचन पर भी रोक लगेगी। जीपी सिंघल प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर।

प्रदेश में सोयाबीन का 48 लाख टन उत्पादन होता है। इससे तैयार तेल लगभग 7200 करोड़ रु. में बिकता है। चार फीसदी वैट के मान से 228 करोड़ रु. सरकार को मिलते हैं। इसकी आधी राशि इनपुट टैक्स रिबेट के रूप में तेल निर्माताओं को दी जाती है।





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