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नहीं जाएंगे गांव छात्र हुए नाराज

इंदौर. एमबीबीएस में एक वर्ष की इंटर्नशिप बढ़ाने के खिलाफ मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी सड़क पर आ गए हैं। गुरुवार सुबह सैकड़ों विद्यार्थियों ने एमवायएच के समक्ष जमकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने एबी रोड पर चक्काजाम की कोशिश भी की, जिसे पुलिस ने विफल कर दिया। 30 नवंबर को दोनों मेडिकल कॉलेज के छात्र एमवायएच की ओपीडी बंद कराकर प्रदर्शन करेंगे एवं रैली निकालकर कमिश्नर को ज्ञापन देंगे।

गुरुवार को बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक घंटे से अधिक समय तक एमवायएच के मुख्य द्वार पर नारेबाजी की। यहां से विद्यार्थी रैली के रूप में शिवाजी प्रतिमा तक पहुंचे और चक्काजाम का प्रयास किया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें हटा दिया। विद्यार्थियों का कहना है अलग-अलग जगह जाने से पीजी की तैयारी मुश्किल हो जाएगी। इंर्टनशिप के दौरान उन्हें मात्र आठ हजार रुपए दिए जाएंगे, जबकि नए डॉक्टरों को 18 हजार रुपए महीने दिए जा रहे हैं। वे गांव में जाने को तैयार है बशर्ते उन्हें स्थाई नियुक्ति देकर 18 हजार वेतन दिया जाए।

आज बंद कराएंगे ओपीडी - 30 नवंबर को एमजीएम मेडिकल कॉलेज, अरविंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस तथा इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के ग्रेजुएशन व पीजी के विद्यार्थी संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे। सुबह आठ बजे एमवायएच की ओपीडी का काम रोकने की कोशिश करेंगे। तत्पश्चात 10 बजे एमवायएच से रैली के रूप में रीगल तिराहा होते हुए कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर कमिश्नर को ज्ञापन देंगे।

तमिलनाडु में आमरण अनशन पर- चेन्नई से मिली खबर के मुताबिक तमिलनाडु के मेडिकल छात्र आमरण अनशन पर चले गए हैं। वे पिछले सात दिनों से हड़ताल पर हैं। हड़ताली छात्रों को मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि वे केन्द्र से बात करेंगे। वे हड़ताल को समाप्त कर दें लेकिन छात्रों ने इसे भी नकार दिया।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी बयान जारी कर कहा है कि यदि सरकार ने पाठ्यक्रम में संशोधन वापस नहीं लिया तो देशभर के 1.75 लाख छात्र सड़कों पर उतरेंगे। उधर स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामडॉस ने हड़ताली छात्रों से कहा है कि केन्द्र ने इस मुद्दे पर विचार के लिए एक कमेटी गठित की है जो छात्रों की मांगों पर विचार करेगा। तमिलनाडु में हड़ताली छात्रों ने केन्द्रीय मंत्री के इस आश्वासन भी नकार दिया है।

हड़ताली छात्र विक्रम विग्नेश का कहना है कि हमें इंटर्नशिप के दौरान केवल 8000 रुपए मिलेंगे जबकि जो डाक्टर वहां पहले से पदस्थापित हैं उन्हें 18000 रुपए दिए जा रहे हैं। सरकार की योजना है कि धीरे-धीरे गांव में चिकित्सा सेवाओं की पूरी जिम्मेवारी छात्रों पर ही सौंप दी जाए। इसके अलावा हमसे से अधिकांश छात्र बैंकों से कर्ज लेकर पढ़ रहे हैं , सरकार के इस कदम से हमें कर्ज चुकाने में दिक्कत होगी।

कलाम ने क्या कहा था- पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने बुधवार को तमिलनाडु के श्रीरामचंद्र यूनिवर्सिटी में स्टेम सेल का उद्धाटन करते हुए कहा था कि प्रत्येक मेडिकल छात्र को कम से कम 50 ग्रामीण मरीजों के इलाज के लिए ग्रामीण इलाकों में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशभर में करीब 75 करोड़ लोग गांवों में रहते हैं और वहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति काफी खराब है।

आक्रोश इसलिए- केंद्र सरकार ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम की इंटर्नशिप में एक साल की बढ़ोतरी कर दी है। इस अतिरिक्त वर्ष में छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देना होगी। वह भी चार-चार महीने अलग-अलग केंद्रों पर। इससे उनमें खासा आक्रोश है।





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