जयपुर. आज सुबह 10 बजे से बिड़ला सभागार में दो दिवसीय रिसर्जेट राजस्थान-पार्टनरशिप समिट का आगाज होगा। इस सत्र में आईसीआईसीआई बैंक के प्रबंध निदेशक केवी कामथ मुख्य वक्ता होंगे। समारोह को उद्योग मंत्री नरपत सिंह राजवी, मुख्य सचिव डीसी सामंत और फिक्की के अध्यक्ष हबिल खोराकीवाला भी संबोधित करेंगे। उद्घाटन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे करेंगी।
आयोजन के प्रारंभिक सत्र में देश के नामी उद्योगपति, निवेशक व विशेषज्ञ राज्य में निवेश बढ़ाने पर विचार-विमर्श करेंगे। इस सत्र के दौरान राज्य सरकार और निवेशकों के बीच सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर भी होंगे। दोपहर में ऑटोमोबाइल, खनिज, टैक्सटाइल, मानव संसाधन विभाग, पर्यटन, कृषि प्रसंस्करण, स्वास्थ्य एवं ढांचागत विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश संभावनाओं पर चर्चा के लिए छह समूह बनाए गए हैं।
उद्योग मंत्री नरपत सिंह राजवी ऑटोमोबाइल, खनिज, टैक्सटाइल समूह की अध्यक्षता करेंगे और इसके समन्वयक प्रमुख शासन सचिव (उद्योग) अशोक संपतराम होंगे। फिक्की के समन्वयक के रूप में वैभव डांगे और तरुण जैन भाग लेंगे।
दूसरा समूह शिक्षा एवं मानव संसाधन विकास का होगा, जिसकी अध्यक्षता शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी करेंगे। समन्वयक प्रमुख शासन सचिव (उच्च शिक्षा) अतुल गर्ग होंगे। पर्यटन राज्यमंत्री उषा पूनिया की अध्यक्षता में पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर का तीसरा समूह बनाया गया है। इसकी समन्वयक प्रमुख शासन सचिव (पर्यटन) श्रीमती मीरा महर्षि होंगी। कृषि प्रसंस्करण के चौथे समूह की कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी अध्यक्षता करेंगे। इस समूह के समन्वयक प्रमुख शासन सचिव (कृषि) आशीष बहुगणा होंगे।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डा. दिगंबर सिंह स्वास्थ्य विषय पर गठित पांचवें समूह की अध्यक्षता करेंगे। इसमें चिकित्सा शिक्षा सचिव गोविंद शर्मा समन्वयक होंगे। ढांचागत विकास के लिए गठित छठे समूह ही अध्यक्षता ऊर्जा राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर करेंगे। सम्मेलन के पहले दिन के समापन पर शाम पांच बजे खुला सत्र होगा।
हालात के आईने में निवेश
जयपुर.
शुक्रवार से शुरू होने वाले रिसर्जेट राजस्थान से नए निवेश के जरिये राज्य की तकदीर चमकाने की बात कही जा रही है। सच्चई यह है कि सरकारी नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण राजस्थान में पिछले चार सालों में नया निवेश सिर्फ अंगुलियों पर गिनने लायक ही है।
पिछले दिनों में बोर्ड ऑफ इन्फ्रास्टक्चर एंड इंवेस्टमेंट प्रमोशन (बीडी) के माध्यम से आने वाले ज्यादातर निवेशकों के प्रोजेक्ट विवादों में फंसने और पर्याप्त सरकारी सहयोग नहीं मिलने के कारण निवेशक राजस्थान में निवेश का मन नहीं बना पा रहे हैं। बाड़मेर में रिफाइनरी लगाने के लिए ओएनजीसी और केयर्न एनर्जी ने रुचि दिखाई थी। इसमें करीब 10 से 12 हजार करोड़ रुपए का निवेश होना था। सरकार की ओर से टैक्स लाभ नहीं दिए जाने के कारण अब इन कंपनियों की रिफाइनरी में अरुचि दिख रही है। खान एवं पेट्रोलियम मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे कहते हैं कि ये कंपनियां 10-12 हजार करोड़ का निवेश करके 26 हजार करोड़ का टैक्स बेनिफिट मांग रही थीं,जो संभव नहीं था।
स्थानीय उद्योगपतियों का कहना है कि राजस्थान पूंजी निवेश के लिए तैयार है और यहां ज्यादा से ज्यादा पूंजी निवेश होना भी चाहिए, लेकिन सरकार की गलत नीतियों और अफसरशाही के असहयोग के कारण उम्मीद के मुताबिक पूंजी निवेश नहीं हो रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार के पास निवेश नीति तो है, लेकिन उद्योग नीति आज तक नहीं बन पाई है। सरकार ने होटल पॉलिसी, मेडीकल ट्यूरिज्म पॉलिसी बनाकर जोर-शोर से प्रचार किया था कि राजस्थान जल्दी ही मेडीकल पर्यटन का हब बन जाएगा, लेकिन इसमें आज तक कुछ नहीं हुआ।
राजस्थान में हुए अब तक हुए पूंजी निवेश और शुक्रवार को होने वाले संभावित पूंजी निवेश को लेकर अधिकारी कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। मुख्य सचिव डी.सी. सामंत के पास केवल एक ही जवाब है कि अभी कुछ पता नहीं है। ब्यूरो ऑफ इंवेस्टमेंट प्रमोशन (बीआईपी) के आयुक्त उमेश कुमार चार साल में करीब 50 हजार करोड़ का निवेश होने का दावा तो करते हैं, लेकिन यह निवेश कहां और किन क्षेत्रों में हुआ, इसकी जानकारी भी उनके पास नहीं है। पिछली कांग्रेस सरकार के समय बनी राजस्थान फाउंडेशन में भी कोई यह बताने को तैयार नहीं था कि चार साल पहले हुई आईआरसी में कुल कितने निवेश के सौदे हुए थे और इनमें से कितने प्रोजेक्ट लग गए तथा कितने बाकी हैं।
बड़े निवेशकों को आती हैं ये परेशानियां:
* विभागों की ओर से जानबूझकर असहयोग और अनावश्यक देरी करना।
* निवेशकों के लिए सरकार का घटिया सूचना तंत्र।
* * स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज को समुचित मदद नहीं मिलना।
* अपर्याप्त आधारभूत ढांचागत सुविधाएं।
* रिसर्च एंड डवलपमेंट क्षेत्र में सरकार की ओर से पर्याप्त मदद नहीं मिलना।
निवेशकों को चाहिए ये सुविधाएं:
* सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम
* निवेशकों के लिए बेहतर सूचना तंत्र
* स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज को पूंजी निवेश के लिए उचित मार्गदर्शन और पर्याप्त मदद
* उद्योगों के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, बिजली, सड़क, रेल और हवाई अड्डे की सुविधाएं
* उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए रिसर्च एडं डवलपमेंट की पर्याप्त सुविधा
* उद्योगों के लिए प्रशिक्षत कर्मचारियों की व्यवस्था
* बेहतर पर्यावरण, इसमें सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर ज्यादा टैक्स, प्रदूषण नियंत्रण के लिए रिसर्च एंड डवलपमेंट, अधिकाधिक जागृति, उद्योगों में पर्यावरण नियमों का कठोरता से पालन, दूषित जल और कचरा निस्तारण का उचित प्रबंधन।
* श्रम कानूनों का सरलीकरण हो, अधिक से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो।
गुजरात को मिला दो दिन में 2.5 लाख करोड़ का निवेशछ
गुजरात में जनवरी, 2007 में आयोजित वाईब्रेंट गुजरात के तहत केवल दो दिन में 2.5 लाख करोड़ रुपए का पूंजी निवेश मिला था। इसका कारण वहां औद्योगिक निवेश के अनुकूल वातावरण, पानी, सड़क, बिजली जैसी आधारभूत ढांचागत सुविधाएं और अफसरशाही की कम से कम दखलंदाजी है। इसमें पूंजी निवेशकों के साथ 104 एमओयू हुए थे।
मध्य प्रदेश को भी मिला एक दिन में 61 हजार करोड़ का निवेश:
इंदौर में पहली बार इसी साल 26 अक्टूबर को हुए निवेशक सम्मेलन में एक ही दिन में 61 हजार करोड़ रुपए से अधिक का पूंजी निवेश मिला था। इसमें 50 हजार करोड़ रुपए का तो अकेले अनिल अंबानी ने ही करार किया था। यहां भी उद्योगों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार ने अपने दरवाजे खोल दिए और उद्योगपतियों को उनकी मर्जी के मुताबिक लोकेशन और टैक्स बेनिफिट देने के वादे किए हैं।