अमृतसर. सर्दी का मौसम बिताने पहुंचे प्रवासी परिंदे हरीके बर्ड सैंचुरी में महफूज नहीं हैं। इनकी सुरक्षा के लिए भले ही वाइल्ड लाइफ विभाग लाख दावे करे,
लेकिन यहां पर तैनात पुलिस और विभागीय मुलाजिमों की तादाद हकीकत को बयां कर जाती है। चूंकि आने वाले दिनों में सर्दी के साथ धुंध और बढ़ेगी, ऐसे में शिकारी सक्रिय हो जाएंगे और इनकी हिफाजत कर पाना मुश्किल होगा।
दूर देस के राही आए
प्रवासी परिंदों का यहां पर आना अक्तूबर माह के आखिर से शुरू हुआ था और अब तक 50 हजार परिंदे यहां हाजिर हो चुके हैं। तरनतारन, कपूरथला और फिरोजपुर तक फैली 50 वर्ग किलोमीटर रकबे वाली इस सैंक्चुरी में पिंटेल, साबलर, ब्राह्मणी डक, कोमन पोचार्ड, विजन, कस्टिड पोचार्ड आदि के 50 हजार के करीब परिंदे हरीके में दाखिल हो चुके हैं। यह परिंदे साइबेरिया, चीन, बंगलादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि से यहां रोजाना 500 किलोमीटर की उड़ान भर कर पहुंचे हैं।
बस, चार पुलिस वाले
यद्यपि इस बर्ड सैंचुरी में हर साल सर्दियों के मौसम में लाख से ऊपर प्रवासी परिंदे आते हैं लेकिन इनकी सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। पहले तीनों जिलों से चार-चार पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे और विभाग के लोग भी सहयोग करते थे लेकिन अब मात्र चार रह गए हैं। फिलहाल इस वक्त पुलिस वालों के
अलावा सैंक्चुरी की तरफ से नौ स्थाई और तीस के करीब दिहाड़ीदार लगाए गए हैं, जो रकबे के हिसाब से काफी कम हैं।
संसाधनों का अभाव
परिंदों को शिकारियों से बचाने की कोशिश भी की जाए, तो संभव नहीं है। क्योंकि जो टीम तैनात है उसके पास समुचित संसाधन नहीं हैं। एक खटारा मेटाडोर जो अक्सर खराब रहती है। पांच बोट हैं लेकिन उनमें से दो चलती हैं क्योंकि फंड की कमी के कारण ईंधन की मुश्किल आती है। विभागीय लोग अगर कुछ करना चाहें तो जेब से खर्च करना पड़ता है।
परिंदों की हिफाजत को लेकर विभाग पूरी तरह से चौकस है। शिकारियों और अन्य शरारती तत्वों को सैंचुरी में सहन नहीं किया जाएगा।
—गुरमीत सिंह, डिप्टी चीफ वाइल्ड लाइफ