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आतंकियों पर फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में

अजमेर. राज्य सरकार ने अजमेर के केन्द्रीय कारागृह स्थित डेजिग्नेटेड कोर्ट के दो फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिवीजन और अपील पेश की है। इनमें से एक आतंकियों पर फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में मामला बहुचर्चित राजेन्द्र मिर्धा अपहरण कांड से जुड़ा है और दूसरा हथियार सहित पकड़े गए आतंकी परमजीतसिंह और उसके साथियों से जुड़ा है।

जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार की ओर से टाडा अदालत के विशेष लोक अभियोजक भागीरथसिंह शेखावत द्वारा तैयार की गई अपीलें कलेक्टर विधि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दी हैं। शेखावत के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अपीलों को लेकर डीआइजी सौरभ श्रीवास्तव को नोटिस भेज दिए हैं।

हरनेकसिंह प्रकरण
डेजिग्नेट कोर्ट ने राजेन्द्र मिर्धा अपहरण कांड के आरोपी हरनेक सिंह उर्फ भप्प उर्फ छोटू को टाडा एक्ट की धारा 3 (1), 4 (1) व 5 के प्रावधानों से डिस्चार्ज कर दिया था। उस पर अपहरण और हथियार रखने का मामला पाते हुए मुकदमा जयपुर सेशन कोर्ट सिटी के सुपुर्द कर दिया था। इसी मामले में सजा भुगत रहे अन्य अभियुक्तों पर भी टाडा के तहत चार्ज नहीं लगा था। अदालत ने माना था कि अभियुक्तों का उद्देश्य राजेन्द्र मिर्धा का अपहरण कर अपने साथी खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के कुख्यात आतंकी देवेन्द्रपालसिंह भुल्लर की रिहाई कराना मात्र था। उन्होंने जनता में भय फैलाने के लिए कोई विस्फोट भी नहीं किया।

मामला, एक नजर..
पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा के पुत्र राजेन्द्र मिर्धा का 17 फरवरी 1995 को दयासिंह लाहौरिया, उसकी पत्नी, नवनीतसिंह कांदिया, हरनेकसिंह आदि ने अपहरण कर लिया था। अपहर्ताओं की मांग थी कि तिहाड़ जेल में बंद पंजाब के आतंकी देवेन्द्रपालसिंह भुल्लर उर्फ दीपक को रिहा किया जाए।

परमजीत प्रकरण
डेजिग्नेटड कोर्ट ने सूरतगढ़ श्रीगंगानगर निवासी परमजीतसिंह, उसके भाई धरमजीतसिंह और दो अन्य आरोपियों कुलदीपसिंह और कारज सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अभियुक्तों को अभियोजन की दो बड़ी खामियों का लाभ मिला। टाडा कानून में अनिवार्य होने के बावजूद इस प्रकरण में अभियुक्तों का इकबाले जुर्म बयान एसपी ने रिकॉर्ड नहीं किए और परमजीत के कब्जे से जो विदेशी वैबलैस स्कॉटिश रिवाल्वर बरामद किया था, बैलेस्टिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट में उस पर विदेशी मार्का नहीं पाए जाने की रिपोर्ट दी।

अपील में तर्क
* जहां से हथियार बरामद किया गया वह टाडा कानून के तहत अधिसूचित क्षेत्र था
* केएलएफ और पंथिक कमेटी के लैटर पैड्स बरामद हुए, दोनों संगठन प्रतिबंधित थे
* गवाहों के बयानों में कहीं भी विशेष विरोधाभास नहीं

क्या थी घटना
यादवेन्द्रसिंह उर्फ यादू पंजाब का कुख्यात आतंकवादी था। पुलिस का दबाव और मुकदमेबाजी से परेशान होकर उसका परिवार सूरतगढ़ में आ बसा। यादवेन्द्र के घर 7 मई 1991 को छापा मारा गया। यादवेन्द्र तो नहीं मिला, लेकिन उसका भाई परमजीत, धरमजीत और जीजा ध्यानसिंह मिले। पुलिस ने तीनों के कब्जे से विदेशी रिवाल्वर, 40 जिंदा कारतूस खालिस्तान कमांडो फोर्स और पंथिक कमेटी के लैटर पैड्स, साढ़े तीन लाख रुपए नकद, साढ़े चार सौ ग्राम सोना, आतंकी भिंडरावाला के कैसेट्स बरामद किए थे। पूछताछ के बाद गजनसिंह, कृपालसिंह, कारजसिंह और कुलदीपसिंह को गिरफ्तार किया गया।

अपील में तर्क
* जहां मुठभेड़ हुई उस मौका ए वारदात पर हरनेकसिंह को देखा गया था।
* राजेन्द्र मिर्धा के अपहरण के पीछे सरकार पर दबाव बनाकर जनता में दहशत फैलाकर अपने साथी की रिहाई कराना था।
* खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स आतंकी संगठन होने के कारण प्रतिबंधित था।





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