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मोटे बच्चों को डायबिटीज का खतरा

नई दिल्ली. एक सर्वे निर्देशिका के मुताबिक भारत के 20 फीसदी से ज्यादा बच्चे मोटापे के शिकार हैं, जिसके कारण उनमें टाइप-2 डायबिटीज से ग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। एमवी हॉस्पिटल फॉर डायबिटीज एंड डायबिटीज रिसर्च सेंटर (चेन्नई) और बायर हेल्थ केयर के डायबिटीज केयर डिविजन के संयुक्त प्रयास से जारी की गई इस निर्देशिका का उद्देश्य भारत में मधुमेह के वास्तविक आंकड़े, मोटापे के कारण और ग्रोथ चार्ट उपलब्ध कराना है।

निर्देशिका जारी करने के अवसर पर एमवी हॉस्पिटल के एमडी विजय वी विश्वनाथ ने कहा कि मोटापे से वयस्कों के मुकाबले बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा होता है। इसकी वजह से कम उम्र में किडनी फेलियर जैसी जटिलताओं की आशंका भी बढ़ जाती है।

क्या है टाइप-2 डायबिटीज टाइप-2 डायबिटीज में पैंक्रियाज इंसुलिन का निर्माण पूरी तरह बंद कर देता है, जिससे रोगी को प्रतिदिन इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। यदि चूक हो जाए तो शरीर में सूजन के साथ ही किडनी फेल होने की आशंका बढ़ जाती है।

कॉलेस्ट्रोल का अटैक से सीधा संबंध नहीं वॉशिंगटन एक नए शोध से पता चला है कि हृदयाघात से होने वाली मौतों में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा का कोई सीधा संबंध नहीं है। शोधकर्ताओं ने नौ लाख लोगों पर किए गए शोध में यह पाया कि जिनके रक्त में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा कम पाई गई थी, उनमें दिल की बीमारियों से होने वाली मौत की दर कम थी। साथ ही यह भी पाया कि उच्च रक्तचाप की बीमारी वाले तथा अधिक उम्र के लोगों में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में कॉलेस्ट्रोल की अधिक मात्रा का कोई सीधा संबंध नहीं है।





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