जानलेवा बीमारी एड्स कई बार ट्यूमर का भी कारण बनती है। एक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम यानी एड्स की बीमारी एचआईवी वायरस के अटैक का परिणाम होती है। यह वायरस शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) पर असर करता है।
इसके परिणामस्वरूप शरीर में बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती है और प्रभावित को कैंसर (ट्यूमर), इंफेक्शन और नर्व सिस्टम के कारण होने वाली बीमारियां होने का खतरा सामान्य व्यक्तियों की तुलना में बढ़ जाता है। एड्स पीड़ितों में कापोसी सरकोमा, लिम्फोमस टाइप का कैंसर आम तौर पर देखने में आता है।
केप्सी सरकोमा में शरीर पर लाल और बैंगनी रंग के चकत्ते पड़ने लगते हैं, जो जल्द ही आकार में बड़े होते जाते हैं। बाद में छोटी ओर बड़ी आंत और फेंफड़े भी इसके जद में आ जाते हैं। जल्द ही शरीर के दूसरे हिस्से भी ट्यूमर से प्रभावित हो जाते हैं।
लक्षण
एड्स से जोड़े जाने वाले कैंसर के लक्षण त्वचा अथवा शरीर केअंदरूनी हिस्से में गांठ पड़ने के रूप में सामने आते हैं। अगर समय रहते ध्यान दें तो बेहततर होता है।
रोग की पहचान
कैंसर की पुष्टि विस्तृत शारीरिक जांच से होती है। कापोसी सरकोमा का पता बायोप्सी के बाद चलता है। त्वचा में बैंगनी या गहरे लाल रंग के निशान अथवा सूजन से भी इसका अंदाजा लगता है। लिम्फोमस और दूसरे प्रकार के कैंसर की जांच के लिए भी बायोप्सी की जरूरत होती है।
उपचार एड्स से जुड़े कैंसर के उपचार के लिए भी कीमोथेरैपी, रेडियोथेरैपी और कांबिनेशन थेरैपी की मदद ली जाती है। कीमोथेरैपी में जहां ट्यूमर के सेल्स को खत्म करने के लिए ड्रग्स की मदद ली जाती है, वहीं रेडियोथेरेपी में रेडियो किरणों से कैंसर को पूरे शरीर में फैलने से रोका जाता है। कांबिनेशन थेरैपी सर्जरी, कीमोथेरैपी और रेडियोथेरैपी का मिला जुला परिणाम है।
सावधानी>> एचआईवी प्रभावित व्यक्ति से यौन संबंध बनाने से बचें।>> कटिंग कराते समय नाई के पास मौजूद ब्लेड की अच्छे से जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि वह हर >> व्यक्ति के लिए नए ब्लेड का इस्तेमाल करे।>> इंजेक्शन लेते समय डिस्पोजेबल नीडल और सीरिंज का उपयोग करें।