मुंबई.
एड्स एक महामारी के रूप में पूरी दुनिया में अपना पांव पसार रहा है। आज भी लोगों में इस बीमारी के बारे में कई तरह की भा्रंतियां हैं। आइए जाने की एचआईवी और एड्स क्या है? इसकी रोकथाम से जुड़ी क ुछ बातों पर एक नजर।
एचआईवी क्या है ?
एच : हयूमन , क्योंकि यह वाइरस केवल मानव को प्रभावित करता है ।
आई : इम्यूनो डिफिसिएंसी, इस वाइरस के आक्रमण करने के बाद मावन का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है और काम नहीं कर पाता है ।
वी : वाइरस, क्योंकि यह जीवधारी एक वाइरस है । मानव कोशिका में जाने के बाद अपने अपने आपको पुन: पैदा करने की क्षमता रखता है। मेडिकल साइंस का ऐसा विश्वास है कि यह वाइरस मानव के प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है जिसके कारण एड्स रोग होता है।
अभी तक एचआईवी को पूरी तरह नष्ट करने वाली दवा नहीं बनी है लेकिन कुछ ऐसी दवाएं है जो इसको कुछ कमजोर कर इसके प्रसार के समय को कुछ कम कर देती है।
एड्स क्या है ?
एड्स शब्द का उपयोग एचआईवी के प्रसार की सबसे उच्च दर को माना जाता है। अर्थात, जब एचआईवी अपने चरम पर मानव में पूरी तरह फैल चुका हो ।
ए : एक्वायर्ड,
यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति संक्रमित होता है ना कि इसका संक्रमण जीन केद्वारा फैलता है।
आई : इम्यूनो, क्योंकि यह शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र पर आक्रमण करता है। मानव का प्रतिरक्षा तंत्र शरीर का वह भाग है जो वाइरस जीवाणु का आक्रमण होने पर उससे लड़ता है ।
डी: डिफिसियंसी
क्योंकि यह प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर उसमें कमी ला देता है अर्थात प्रतिरक्षा तंत्र ऐसी स्थिति में सही तरह से काम नहीं कर पाता है ।
एस : सिंड्रोम
इस शब्द का इसलिए इस्तेमाल करते है क्योंकि एड्स पीड़ित व्यक्ति को एक साथ कई बिमारियों का सक्रमण होता है और कोई भी बिमारी प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर हो जाने के बाद मौका पाकर जकड़ लेती है ।
आखिर किसी व्यक्ति को कब एड्स का रोगी माना जाता है ?
* व्यक्ति जिसका रक्त एचआईवी पाजिटीव की स्थिति को बताता हो।
* इसके साथ ही उसकी सीडी 4 टी सेल की गणना २00 से नीचे जा चुकी हो या फिर उस पर कई बिमारियों का व्यापक संक्रमण आसानी से हो रहा हो ।
यह ध्यान देने वाली बात है कि अगर किसी व्यक्ति का एचआईवी टेस्ट पाजिटीव आता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह एड्स का रोगी है। एक व्यक्ति को एड्स का रोगी चिकित्सक क्लीनिकल कसौटी पर जांचने के बाद ही घोषित कर सकता है ।