इंदौर. आलोच्य रूई वर्ष में उत्पादन 3 करोड़ गांठ से अधिक है। वर्तमान में रूई की प्रतिदिन आवक लगभग 1.50 लाख गांठ के आसपास है, आवक में वृद्धि का क्रम जारी है। किसान अच्छे मूल्यों की प्राप्ति होने से माल रोकने का प्रयास नहीं कर रहा है लेकिन वर्तमान भावों में मिलों को पड़ता नहीं होने के कारण खरीदी में विशेष दिलचस्पी नहीं ले रहा है।
ऐसे में रूई के भावों में आंशिक मंदी आई है। वहीं दूसरी ओर विदेशों में रूई वायदा बाजार में मंदी के कारण से कामकाज में भी कमी आई है। देश में अभी तक 62 लाख गांठ की आवक हो चुकी है। देश के सभी रूई उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन गत वर्ष की अपेक्षा अधिक हो रहा है।
सर्वाधिक आवक 21 लाख गांठ से अधिक की हो चुकी है जो विगत वर्ष की तुलना में डेढ़ गुना अधिक है। पंजाब में 8.5 लाख गांठ से अधिक की आवक हो चुकी है। मध्यप्रदेश में 6.10 लाख की आवक रही है, जबकि गत वर्ष 2.75 लाख गांठ रूई थी। मध्यप्रदेश में कपास और कपास्या का व्यापार बिना बिल के बड़ी मात्रा में हो रहा है। गुजरात में बोलगार्ड रूई का उत्पादन क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 100 प्रतिशत बढ़ा है।
किसानों ने 23.5 लाख एकड़ में इसकी बोवनी की है। देशभर में बी.टी. कॉटन की क्वालिटी अच्छी होने से इसकी मांग भी तेजी के साथ बढ़ रही है। इस कारण एक्स्ट्रा लांग स्टेपल रूई के भाव दबे हैं। मिलों का ध्यान आयातित ई.एल.एम. रूई की ओर होने लगा है। डॉलर की कमजोरी से मिलों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। विदेशी बाजार में वर्तमान में दिसंबर, मार्च और मई वायदा चल रहा है जबकि भारतीय रूई वायदा बाजार में व्यापार नहीं के समान है।