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पतियों के रहमोकरम पर पाकिस्तानी महिलाएं

अमृतसर. राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने फौजी वर्दी उतार दी है। इमरजेंसी भी हट जाएगी। नई सरकार भी बनेगी, लेकिन पाकिस्तानी महिलाओं की बदतर हालत में कोई सुधार नहीं होगा। आज भी देश के करीब 77 फीसदी शौहर अपनी बीवियों को पीटना और प्रताड़ित करना शान समझते हैं। यह कहना है अमृतसर आए फैसलाबाद के युवा वकील मोहम्मद अमीन का।

अमीन ने बताया कि लाहौर की मानवाधिकार कार्यकर्ता मुनीजा हाशमी के ताजा सर्वे के मुताबिक देश में 45 फीसदी महिलाओं को पुरुषों की मार खानी पड़ती है और 32 फीसदी को बात-बात पर पति की फटकार।

आजादी से हैरान :

अमीन ने बताया कि वे भारत में महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते देख हैरान हुए। उनका मानना है कि इस मामले में पाकिस्तान आज भी भारत से बहुत पीछे है। अमीन ने बताया कि पाकिस्तानी महिलाएं भारत में औरतों की आजादी देख अपनी व्यवस्था को कोसती हैं।

गुलाम बेगम : अमीन ने बताया कि पाक में घरेलू हिंसा को निकाह का हिस्सा समझा जाता है। ज्यादातर घरों में महिलाओं की सलाह को भी अहमियत नहीं दी जाती। पाकिस्तानी शौहर अपनी बीवियों से गुलामों सा व्यवहार करते हैं। शौहर के जुल्मों से तंग आकर कई बीवियां खुदकुशी कर लेती हैं।





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