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हर दिन मनाया जाए विश्व एड्स दिवस

अभिमत.विश्व एड्स दिवस का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग है। कुछ लोगों के लिए इसका अर्थ है उन लोगों को याद करना जो एड्स के कारण मौत के मुंह में समा गए। कुछ लोगों के लिए इसका मतलब उनकी मदद करना है जो एचआईवी/एड्स के साथ जी रहे हैं। और कुछ लोगों के लिए बचाव व इलाज के जरिये इस भयानक रोग का मुकाबला करना है।

यह दिन हमें उस अपमान और भेदभाव की याद भी दिलाता है जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में एचआईवी संक्रमित या पीड़ित मरीजों को रोज झेलना पड़ता है। इन सभी कारणों के चलते हर दिन विश्व एड्स दिवस मनाया जाना चाहिए।

एचआईवी/एड्स से जुड़े मुद्दों पर भारत में व्यापक पहल हुई है और बचाव व इलाज के एजेंडा पर काफी प्रयास हुए हैं। सरकार और कई गैरसरकारी संगठन इस दिशा में काम कर रहे हैं। मगर फिर भी इस मामले में काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। इन मामलों पर चर्चा करने, अपनी असुरक्षा की पहचान करने और अपने व्यवहार के प्रति जिम्मेदार होने में हम सभी को अपने मानसिक गतिरोध ढहाना होंगे। इस तरह से हम एचआईवी की रोकथाम में अपना योगदान देकर कई जिंदगियां बचा पाएंगे।

भारत की विशाल आबादी को देखते हुए, सकारात्मक बदलाव के लिए हमारे पास प्रचुर संसाधन मौजूद हैं। इस दिशा में शुरुआत हम खुद से ही इन सवालों को पूछकर कर सकते हैं- क्या एड्स के बारे में जानकारी हमें है, एचआईवी से बचने के तरीके हमें पता हैं, यदि हमें पता चले कि कोई व्यक्ति एचआईवी संक्रमित है, तो उसके साथ हम कैसा सलूक करेंगे, हमारा खुद का एचआईवी स्टेटस क्या है? हममें से हर एक को अपने परिवार, स्कूल, कार्यस्थल या समुदाय के संदर्भ में जिम्मेदारी लेते हुए अपनी सही भूमिका निभानी होगी।



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