जयपुर. अपनी और सरकार की आलोचना से आहत मुख्यमंत्री वसुंधराराजे शुक्रवार को रिसर्जेट राजस्थान में खुद को नहीं रोक पाईं। मेहमान उद्योगपतियों के सामने ही उन्होंने कहा कि वे राजस्थान के विकास के लिए इतना कुछ कर रही हैं फिर भी अखबारों में यही हैडलाइंस पढ़ने को मिलती हैं कि कौड़ियों में जमीन दे दी, सीएम पैसा खा गईं। फलां संस्था या कंपनी को जमीन कौड़ियों में दे दी। इस तरह की आलोचना से वे बेहद आहत हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अखबार बेचने और टीआरपी रेटिंग बढ़ाने की ही चिंता नहीं होनी चाहिए। आलोचना सही हो तो ठीक है, लेकिन मीडिया लोगों को उम्मीद की किरण भी दिखाए। गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में जो विकास हुआ है, वह किसी एक व्यक्ति या सरकार के बल पर नहीं बल्कि सभी के सहयोग से हुआ है। इसमें मीडिया भी शामिल है।
फिक्की और राज्य सरकार के सहयोग से यहां बिडला ऑडिटोरियम में शुरू हुए रिसर्जेट राजस्थान के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवर्तन यात्रा के दौरान हमने जो सपना देखा था। सत्ता में आने के बाद उसे हकीकत में बदलने के प्रयास कर रहे हैं। वल्र्ड बैंक, विपक्षी दल, केन्द्र सरकार और उद्योगपति मान रहे हैं कि राजस्थान अब तेजी से विकसित हो रहा है।
इसके बावजूद भी हमारी आलोचना हो रही है। आईसीआईसीआई के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक के.वी. कामथ की राजस्थान को उत्तरी क्षेत्र का हब बनाने की घोषणा का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इन्हें जमीन दी तो फिर कहेंगे कि कौड़ियों में जमीन दे दी, सीएम पैसा खा गईं। इस तरह के हैडलाइंस उन्हें परेशान करने वाले होते हैं।
हम पाइपलाइन बदलने की सोच रहे हैं, फिर भी मीडिया कहता है लोग गंदे पानी से मर रहे हैंमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सड़क, पानी, बिजली के क्षेत्र में काफी काम किया है, फिर भी सवेरे पढ़ने को मिलता है कि गंदे पानी से मौत हो रही हैं। हम शहर की पाइप लाइनों को बदलने पर सोच रहे हैं। पिछले पचास साल में किसी ने इस बारे में नहीं सोचा।
एक स्कूल में सूखी रोटी दे भी दी तो क्या हुआ : वसुंधरा ने कहा मिड डे मील में बच्चों को स्वादिष्ट खाना दिया जा रहा है। सुबह हैडलाइंस मिलती है-बच्चों को सूखी रोटी दी जा रही है।
एक स्कूल में यदि ऐसा हो भी गया तो क्या हुआ। बाकी एक हजार जगह जहां अच्छा खाना मिल रहा है मीडिया उसको देखे।
जमीनें दे दी, टाइमलाइन तय कर दी है : मुख्यमंत्री ने शाम को पत्रकारों से कहा कि सेज विकास के लिए जरूरी हैं, नंदीग्राम बनाने के लिए नहीं। हमने ध्यान रखा है कि निवेश एक ही जगह पर न हो। सभी को रोजगार के अवसर मिलें और सभी विकास में भागीदार हों, इसलिए जयपुर के अलावा अन्य बड़े शहरों के आसपास भी निवेश कराने पर विचार किया जा रहा है।
राजस्थान नंदीग्राम नहीं बने, इसका खास ध्यान रखा जाएगा। शुक्रवार को रीसर्जेट राजस्थान में निवेश के एमओयू करने वाली कंपनियों को जमीन अलॉटमेंट और अन्य लाभ देने का काम हो चुका है। सभी की टाइमलाइन तय कर दी है। अगले दो-तीन माह में इन कंपनियों का काम शुरू हो जाएगा। मुख्य सचिव को जिम्मेदारी दी गई है कि वे प्रत्येक माह के पहले और तीसरे शनिवार को इन पूंजी निवेश के मामलों की समीक्षा करेंगे।