जयपुर . राजस्थान की शैक्षिक परियोजना शुक्रवार को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की आपसी लड़ाई की भेंट चढ़ गई। ‘एजुकेशन वैली’ नाम वाली इस परियोजना को ऐन वक्त पर शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने निरस्त कर दिया। परियोजना के तहत 4000 करोड़ रुपए के निवेश से आईआईटी और आईआईएम की तर्ज पर 16 शिक्षण संस्थान एक ही जगह बनने थे।
परियोजना का प्रजेंटेशन देख चुकीं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अधिकारियों के माध्यम से इसे ‘रिसजेर्ंट राजस्थान’ में प्रस्तुत करवाने के लिए कहा तो अधिकारियों के पसीने छूट गए। मुख्यमंत्री कार्यालय और शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव कार्यालय में देर शाम तक इस प्रकरण को लेकर कशमकश चल रही थी। ‘भास्कर’ ने अफसरों से पूछा तो वे किसी तरह की टिप्पणी करने से बचते रहे।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के झगड़े को लेकर अफसर तो परेशान थे ही, परियोजना में निवेश करने के लिए आए कंपनी के अधिकारी भी निराश होकर दिल्ली लौट गए। ‘एजुकेशन वैली’ परियोजना ला रहे अनंतराज इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों को अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि वे मुख्यमंत्री के माध्यम से परियोजना को मंजूरी दिलाने की कोशिश करेंगे, लेकिन कंपनी के प्रतिनिधि नहीं रुके।
इस परियोजना का प्रेजेंटेशन 16 नवंबर 07 को किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, रेवेन्यू और बीआईपी के आला अफसर मौजूद थे।
क्या थी परियोजना?
नाम : एजुकेशन वैली
कंपनी : अनंतराज इंडस्ट्रीज, दिल्ली
कहां : दिल्ली-जयपुर नेशनल हाइवे पर शाहजहांपुर के निकट।
जमीन कितनी : 500 एकड़।
परियोजना में यह बनना था : एमबीए, लॉ और इंग्लिश के पांच कॉलेज, सामान्य शिक्षा के छह कॉलेज, सैकंडरी और सीनियर सैकंडरी के पांच स्कूल और हैल्थ केयर के कई संस्थान।
मंत्री की आपत्ति क्या थी?
शिक्षा मंत्री तिवाड़ी के पास परियोजना की पत्रावली गई तो उन्होंने इसे नामंजूर करते हुए लौटा दिया। अफसरों ने दुबारा पत्रावली भेजी तो उन्होंने लंबी टीप दर्ज करते हुए लिख दिया कि पांच सौ करोड़ रुपए की जमीन 75 करोड़ रुपए में इस कंपनी को कैसे दी जा सकती है ? तिवाड़ी ने पत्रावली पर यहां तक लिख दिया कि एक ही ग्रुप को किस आधार पर केवल 16 संस्थाओं के लिए जमीन दी जा रही है? यह ग्रुप आईआईटी, आईआईएम, एआईआईएमएस स्तर के संस्थान स्थापित करने का मकसद रखता है तो ये संस्थान इतने कम क्षेत्र में कैसे स्थापित होंगे।
शिक्षा विभाग के अफसरों ने तिवाड़ी यह समझाने की कोशिश की, कि प्रकरण आपके पास शिक्षा के मकसद से आया है, जमीन के लिए नहीं, तो उन्हें जवाब मिला : आपका क्या इंट्रेस्ट है?
‘‘एजुकेशन वैली की हमारी परियोजना को आज मंजूरी मिलने की संभावना थी, लेकिन अभी नहीं मिली। हमें उम्मीद है कि यह काम हो जाएगा। हमारा मकसद राजस्थान को एक अलग तरह की परियोजना देना था। अमन सरीन, डायरेक्टर, अनंतराज इंडस्ट्रीज, नई दिल्ली
‘‘परियोजना तो थी, लेकिन इसका क्या हुआ, इस बारे में आप मंत्री जी से ही पूछ लें। सुधीर भार्गव, प्रमुख सचिव, शिक्षा विभाग