मुंबई. भारत में 30 लाख लोग एचआईवी वाइरस के वाहक बनकर घूम रहे हैं लेकिन वे इस बारे में पूरी तरह अनभिज्ञ हैं।
विश्व एड्स दिवस के अवसर पर महानगर स्वास्थ्य सेवा के निदेशक (अभियान) डा. निलेश शाह ने बताया कि एचआईवी शरीर की प्रतिरोधी तंत्र को कमजोर करता है। यह तंत्र रोगों और संक्रमण से लडने में मददगार है।
उन्होंने कहा कि संक्रमण के शुरूआती चरण में इसके कोई लक्षण नहीं उभरते हैं। लेकिन धीरे़,धीरे प्रतिरोधी तंत्र कमजोर हो जाता है और पीडित में अन्य रोगों और संक्रमण की संभावना बढ जाती है।
डा. शाह ने कहा कि एचआईवी संक्रमण का अंतिम चरण एड्स है। एचआईवी संक्रमण होने से एड्स होने तक 10 से 15 वर्ष का समय लग सकता है। अभी तक एचआईवी वन और टू की की पहचान हो चुकी है। ये दूसरी तरह के संक्रमण से पीडित लोगों में शुरूआती चरणों में कम संक्रमण होता है लेकिन विषाणु के बढने के साथ-साथ संक्रमण बढता जाता है।
एचआईवी संक्रमण के लक्षणों में लसिका ग्रंथि में सूजन, बुखार, ठंडा लगना, रात को पसीना आना, डायरिया, वजन कम होना, खांसी और सांस लेने में परेशानी, लगातार थकान महसूस होना, त्वचा पर सूजन आना, नजर कमजोर होना, सरदर्द और अन्य संक्रमण होना शामिल है1
डा. शाह ने एचआईवी संक्रमण से जुडी भ्रांतियों को खारिज करते हुए कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ काम करने. उसके साथ रहने या उसके साथ भोजन करने से एचआईवी नहीं फैलता है।
उन्होंने कहा कि एचआईवी परीक्षण कई प्रकार के होते हैं। इनमें एचआईवी संक्रमण का शुरूआती परीक्षण और इसकी पुष्टि के लिए किया गया परीक्षण शामिल है। एचआईवी संक्रमण की पुष्टि के लिए सामान्यतः वेस्टर्न ब्लाट टेस्ट किया जाता है।