नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय ई-मेल लॉटरी घोटाले के तार अब जयपुर से भी जुड़ गए हैं। साइबर धोखाधड़ी के इस मामले का यह नया पहलू तब उजागर हुआ, जब ऑनलाइन ब्रिटिश लॉटरी घोटाले के शिकार कुछ लोगों द्वारा मुंबई और जयपुर के अपने बैंक खातों में लाखों रुपए जमा कराए जाने का पता चला। इस घोटाले में शामिल रैकेट का पता लगाने के लिए जयपुर में जांच शुरू हो गई है।
उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार भारत में दर्जनभर से अधिक लोगों ने उन ई-मेल संदेशों का जवाब भेजा था, जिनमें उन्हें एक ब्रिटिश लॉटरी में लाखों डॉलर इनाम जीतने की सूचना दी गई थी। इन कथित विजेताओं ने भारत में विभिन्न बैंक खातों में रुपए जमा कराए थे।
जयपुर स्थित एक बैंक खाते में आठ लोगों ने 55 लाख डॉलर की लॉटरी की रकम पाने के लिए 28 नवंबर को 4.90 लाख रुपए जमा कराए। इसी बैंक की मुंबई स्थित शाखा में भंडारी पान भंडार के नाम पर खुला एक और खाता भी शक के दायरे में आया है।
जयपुर पुलिस को गुरुवार की शाम बैंक खाते और मोबाइल नंबर के विवरण के साथ राजस्थान निवासी एक व्यक्ति के बारे में औपचारिक शिकायत मिली थी। इस व्यक्ति पर उन खातों में से एक खाते को चलाने का आरोप है, जिनका इस्तेमाल इस घोटाले के तहत लेन-देन में हुआ था।
दिल्ली के व्यापारी थॉमस कुट्टी के मुताबिक, उन्हें भी वायने थॉम्पसन ने ई-मेल आईडी इंफोस्विटविन0555एटयाहू.सीओ.यूके के मार्फत लॉटरी जीतने के बारे में कई ई-मेल सदेंश भेजे थे। उन्हें जयपुर के एक खाते में क्लियरेंस शुल्क जमा कराने को कहा गया था।
कैसे होता है ई-मेल लॉटरी घोटाला?
* इसमें जालसाज लोग पहले तो ब्रिटिश या अमेरिकी लॉटरी जीतने के बारे में अचानक ई-मेल करते हैं।
* फिर प्राप्तकर्ता को पैसे के भुगतान के तरीके के बारे में जानकारी दी जाती है। स्कैन किए गए पत्र, बैंक चैक तथा विजेता का नाम दर्शाने वाले अन्य विवरण भेजे जाते हैं।
* लॉटरी की रकम क्लियरेंस कराने के नाम पर कथित विजेता से 200 से 1000 डॉलर का शुल्क मांगा जाता है। यह रकम निर्दिष्ट खातों में यथासमय जमा करानी होती है।