HomeNewsNational National

'मलेशिया के मामलों में दखल न दे भारत'

कोच्चि/ मुंबई/ कुआलालंपुर.मलेशिया में भारतवंशी हिंदू समुदाय के साथ कथित भेदभाव को लेकर विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा संसद में व्यक्त की गई चिंता के जवाब में मलेशियाई विदेश मंत्री ने शनिवार को कहा कि ‘किसी भी देश को मलेशिया के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देना चाहिए’।

इस बीच भाजपा ने इस मसले पर डीएमके के रुख का समर्थन करने की घोषणा की है।मलेशिया के विदेश मंत्री सैयद हमीद अलबर ने कुआलालंपुर में कहा, ‘सभी मलेशियाई नागरिकों को, चाहे वे किसी भी जाति या समुदाय के हों, अपने देश के कानून का पालन करना होगा। अगर वे कानून तोड़ेंगे तो उनसे मलेशिया के कानून के मुताबिक ही निपटा जाएगा’।

भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा इस मामले में जताई गई चिंता के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में हमीद ने कहा कि हम भारत की चिंता से वाकिफ हैं, लेकिन यह मलेशियाई नागरिकों का मामला है।

हिंदुओं का दमन अस्वीकार्य

मलेशिया के पूर्व उप प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भारतवंशी हिंदुओं पर सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के दमन की निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया है। मुंबई में आयोजित इस्लामिक पीस कॉन्फ्रेंस के बाद संवाददाताओं से चर्चा करते हुए इब्राहिम ने भारत द्वारा इस संबंध में जताई गई चिंता का भी समर्थन किया।

हम डीएमके के साथ : भाजपाभाजपा ने कहा है वह मलेशिया के मुद्दे पर डीएमके के साथ है। पार्टी के उपाध्यक्ष एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को कोच्चि में कहा कि ‘भारतीय नेताओं को विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के लोगों की हालत पर चिंता व्यक्त करने का अधिकार है’। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने भारतवंशी तमिलों की स्थिति पर चिंता जताकर मलेशिया के अंदरूनी मामले में दखल नहीं दिया है।

आंदोलन में सिर्फ हिंदुओं को बुलायावेंकटेशन वेंबू : हांगकांग मलेशिया में समान अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान भारतवंशियों के बीच धार्मिक एकजुटता नदारद रही। हिंदू राइट्स एक्शन फोर्स (हिंड्राफ) के प्रदर्शन में केवल तमिल हिंदुओं ने ही भाग लिया। अन्य सम्प्रदाय के लोगों को उससे जोड़ने की कोशिश भी नहीं की गई।

पत्रकार मिशेल गुनासेलन इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हरुई क्योंकि वे मलयाली-तेलुगु भारतवंशी होने के साथ ही कैथोलिक हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे महसूस हुआ कि मुझे बाहर या अलग कर दिया गया है। हिंड्राफ ने उस दिन जो किया, वह धर्म या नस्ल की राजनीति से कुछ अलग नहीं था। मलेशियाई विद्वान फारिश नूर कहते हैं, ‘हिंड्राफ ने कई लोगों को अलग कर दिया है। गरीबी, समानता के मुद्दे पर धर्म की छाया पड़ गई है। सभी के लिए समानता का मुद्दा उठाया जाता तो बेहतर होता।’





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: