नई दिल्ली.एक नाबालिग लड़की से उसके परिजनों के सामने बलात्कार करने के आरोपी को दोषी ठहराते हुए अदालत ने 10 साल की कैद और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा है कि इस तरह का अपराध विकृत मानसिकता को दर्शाता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने सजा सुनाते हुए कहा कि सेक्सुअल अब्यूज एक अलग तरह का अपराध है जो आम तौर पर विकृत मानसिकता का परिणाम है। रेप करने वाला असहाय लड़की या महिला का न केवल मानभंग करता है बल्कि उसकी प्रतिष्ठा को भी कलंकित करता है। इसका प्रभाव तब और बुरा होता है जब इस तरह की हरकत परिवारवालों के सामने की जाए।
यह मामला 24 सितंबर 2004 का है जब आरोपी संतोष दिल्ली के मुखर्जी नगर स्थित लड़की के घर पर पहुंचा। लड़की उसे पहले से जानती थी। संतोष ने लड़की की मां, छोटे भाई और बहनों के सामने उसके साथ बलात्कार किया।
लड़की की मां ने जब संतोष को रोकने की कोशिश की तो उसने तेज हथियार से उन पर हमला किया। आरोपी ने घटना के बारे में किसी को कुछ नहीं बताने की धमकी भी दी। अभियोजन पक्ष ने अपने आरोप के समर्थन में मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की जिसमें रेप की पुष्टि की गई थी।