जयपुर. राज्यपाल शीलेंद्र कुमार सिंह विवादित बयान देकर फिर सुर्खियों में आ गए हैं। रविवार को रवींद्र मंच पर डॉ. अंबडेकर जयंती समारोह समिति व अनुसूचित
जाति विकास परिषद के दीपावली स्नेह मिलन समारोह में अगड़ी जातियों को आरक्षण देने की खिलाफत करते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि ब्राह्मण और राजपूत समाज के लड़के मेरे पास आए और गरीब तबके के लड़कों को आरक्षण की वकालत करने लगे, मैंने उन्हें राजभवन से निकाल दिया।
राज्यपाल ने कहा कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान है। उसका वे आदर करते हैं कि गरीब तबके के लड़कों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी है कि बड़ी जातियों को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए और यह बात सही भी है। जातिप्रथा को विकार बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि सबसे पहले इसको समाप्त करने की पहल राजा राममोहन राय ने की थी। उसके बाद विवेकानंद, रवींद्र नाथ टैगोर, महात्मा गांधी सहित कई लोग आए, लेकिन समाज को विखंडित करने की शुरुआत वीपी सिंह ने की।
राज्यपाल ने कहा कि महात्मा गांधी और अंबेडकर के बीच वैचारिक मतभेद थे, लेकिन आधुनिक भारत के मनु तो बाबा साहब भीमराव अंबेडकर हैं, जिन्होंने संविधान का सबसे बड़ा हिस्सा लिखा है, जिसे पढ़ने में कई साल लग जाते हैं। समारोह में चुटकी लेते हुए राज्यपाल ने यहां तक कह दिया कि वे एक फील्ड एक्टर की तरह हैं। एक्टर को तो फिर भी पैसा मिलता है, लेकिन उन्हें तो वह भी नहीं मिलता।
कार्यक्रम में शिरकत करने आए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रोफेसर तुलसीराम ने कहा कि आज हमें भेदभाव की नजरों से देखा जाता है। हमें समानता का हक मिलना चाहिए। कार्यक्रम के आयोजक व प्रशासनिक अधिकारी लालचंद असवाल ने इस मौके पर निर्धन बालिकाओं को मुफ्त शिक्षा देने के लिए स्कॉलरशिप की शुरुआत की।
* राजपूत और ब्राह्मण समाज के लड़के आरक्षण मांगने आए थे, मैंने उन्हें राजभवन से निकाल दिया।
—शीलेंद्र कुमार सिंह