bhaskar Web English
HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

सर, ये महात्मा गांधी कौन थे?

जयपुर. ‘सर, ये महात्मा गांधी कौन थे, कस्तूर बा कौन थीं और उनका महात्मा गांधी से क्या रिश्ता था?’ ये सवाल राजभवन और शिक्षा विभाग के दफ्तरों में गूंज रहा है। वजह है शिक्षा विभाग के अफसरों से राज्यपाल का यह पूछना कि आखिर सरकारी स्कूलों के बच्चों को इतनी-सी बात क्यों नहीं मालूम? शिक्षा विभाग अब इस हकीकत के तथ्य जुटाने की बात कह रहा है। राज्यपाल का कहना है कि अगर सरकारी स्कूलों के बच्चों को इतना-सा भी ज्ञान नहीं मिल पा रहा तो शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों के बखान का मतलब ही क्या है ?

दरअसल यह प्रकरण राज्यपाल की हाल की आदिवासी जिलों की यात्रा के बाद उठा है। महामहिम ने कस्तूरबा गांधी छात्रावासों में पढ़ने वाली बच्चियों से जब बा के बारे में पूछा तो उनमें से कोई भी इसका जवाब नहीं दे परई। बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम और उसमें गांधीजी के योगदान के बारे में भी कुछ पता नहीं था। इसके बाद राज्यपाल ने मौके पर ही शिक्षा विभाग के उन अफसरों को तलब कर लिया, जो विभाग की उपलब्धियों का बखान करके लौटे थे, लेकिन उनसे कोई जवाब देते नहीं बना।

बहरहाल, राज्यपाल के दौरे के बाद राजभवन में यह सवाल गूंज रहा है कि प्रदेश में शिक्षा की स्थिति इतनी खराब क्यों है ? राजभवन के सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल पानी वाले अफसरों की तरह स्कूल वाले अफसरों को भी किसी भी क्षण बुलावा भेज सकते हैं और ‘अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए’ कह सकते हैं। क्यों हैं ये हालत ?

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बदतर हालत की असलियत ‘प्रथम राजस्थान’ की ‘एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट 2007’ से भी पता लगती है। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों के 36 प्रतिशत बच्चे एक पैराग्राफ तक नहीं पढ़ सकते। 51 प्रतिशत को कहानी पढ़नी नहीं आती। 42.2 प्रतिशत को घटाना और 61.1 प्रतिशत को भाग देना नहीं आता।

प्रथम राजस्थान और 24 अन्य गैर सरकारी संगठनों ने इसी साल 32 जिलों के 640 गांवों में 27163 बच्चों के बीच सर्वे किया था। रिपोर्ट के अनुसार 32.9 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते। 10.6 प्रतिशत बच्चियां कभी घरों से बाहर नहीं निकलतीं। 10 प्रतिशत स्कूलों में शिक्षक ही नहीं आते, जबकि 25 प्रतिशत अध्यापक गैरहाजिर रहते हैं। प्राइमरी में 31 प्रतिशत और मिडिल में 27.8 प्रतिशत बच्चे गैरहाजिर रहते हैं।

* हमने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन महामहिम के दौरे में जो सवाल उठा है, उस बारे में हम तथ्यात्मक जानकारी करवा रहे हैं।
—वासुदेव देवनानी, शिक्षा राज्य मंत्री





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: