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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur कोरबा. बाबा रामदेव के योग शिविर के आज तीसरे दिन हजारों लोगों ने योग के सागर में गोते लगाए। पिछले दो दिनों की तरह ही आज तड़के शुरु हुए शिविर में
कोई दस हजार से अधिक लोगों को बाबा रामदेव ने योगाभ्यास कराया। रविवारीय अवकाश होने के कारण आज दोपहर ३ बजे से ५ बजे तक बाबा रामदेव ने पुन: शिविर आयोजित किया, जिसमें प्रवेश के लिए किसी भी तरह की कोई रोकटोक नहीं थी।
बाबा रामदेव ने दोपहर के सत्र में भी हजारों शिविरार्थियों को योगाभ्यास कराया। योग के साथ-साथ आयुर्वेद समेत अन्य चिकित्सा पद्धति के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद का संयोग हो तो ऐसी कोई बीमारी नहीं जो ठीक न हो सके। योगीराज ने कहा कि एलोपैथ या अन्य चिकित्सा पद्धति के वे आलोचक नहीं है। सभी चिकित्सा विधा लोगों के हित के लिए है। कुछ मामलों में एलोपैथ और कुछ में होम्यापैथी असरकारक हैं।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के साथ तो योग स्वत: जुड़ा हुआ है। किसी भी चिकित्सा पद्धति से रोग नियंत्रित तो हो सकता है मगर मेरा ही नहीं हजारों अन्य लोगों का अनुभव है कि रोग से पूरी तरह छुटकारा पाना है तो योग जरुरी है। योग से ही लोग स्वस्थ होंगे और जब लोग स्वस्थ होंगे तो देश भी स्वस्थ और शक्तिशाली होगा।
औषधि वितरण एवं जांच केंद्र पर उमड़ी भीड़
इंदिरा स्टेडियम में पतंजलि योग समिति के औषधि वितरण एवं जांच केंद्र खुलते ही भीड़ उमड़ पड़ती है। जांच केंद्र में ४क् वैद्य अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दवा वितरण में १क्क् से अधिक फार्मासिस्ट लगे हुए हैं। आज रविवार अवकाश का दिन होने तथा दोपहर को आमजनों के लिए नि:शुल्क खुला शिविर होने के कारण हजारों लोग उमड़ पड़े। ट्रांसपोर्ट नगर चौक से स्टेडियम तक बार-बार जाम की स्थिति बन रही थी। डीएसपी हेडक्वार्टर रजत शर्मा, टीआई आईसी शांडिल्य, बीएस खूटिया सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल यातायात नियंत्रित करने में दोपहर से शाम तक लगा रहा।
औषधि वितरण एवं जांच केंद्र में किस तरह से लोग उमड़ पड़े थे इसका सहज अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि करीब १२ हजार से अधिक मरीजों का परीक्षण वैद्यों ने किया। आलम यह था कि वे मरीजों की जांच करते-करते ठंड के इस मौसम में भी पसीने से सराबोर हो रहे थे। वैद्यों ने बताया कि कोरबा में श्वांस, चर्म, हृदय, हड्डियों और गांठों के दर्द, गैस्टिक के मरीज बड़ी संख्या में आए हैं। बहुत से मरीज असाध्य रोगों से भी पीड़ित नजर आए।
कोरबा के अलावा कटघोरा, पाली, गेवरा-दीपका, बालको, रजगामार, र्दी, जमनीपाली, उरगा, चांपा, बरपाली, जशपुर, रायगढ़, अंबिकापुर, बिलासपुर ही नहीं पड़ोसी प्रांत उड़ीसा, झारखंड, महाराष्ट्र से भी लोग अपनी पीड़ा के उपचार के लिए यहां पहुंचे।