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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur रायगढ़.
जीआरपी की सूचना पर युवक ने कोर्ट में बताया-उसकी ‘हत्या’ नहीं हुई बल्कि ‘हत्या का प्रयास’ किया गया था।
यह सनसनीखेज खुलासा किया है पश्चिम बंगाल व गुजरात पुलिस के रिकार्ड में मृत कोसपा (पं. बंगाल) निवासी देवव्रत पिता सुनील मंडल (20 वर्ष) ने। देवव्रत ने अदालत में अपने बयान में बताया कि मारपीट कर चलती ट्रेन से उसे नीचे धकेलने वाले जैनुद्दीन व रणजीत रोहिदास थे। कोर्ट ने देवव्रत का बयान दर्ज करने के बाद आरोपियों को पुन: जेल भेज दिया।
जीआरपी थाना प्रभारी एन. साय ने बताया कि इस प्रकरण में अब आरोपियों के खिलाफ भादवि की धारा 307 (हत्या का प्रयास) सहपठित धारा 34 के तहत प्रकरण दर्ज किया जाएगा। अदालत में देवव्रत के बयान व दो आरोपियों को पहचानने के बाद जीआरपी टीम उसे सकुशल कोसपा पं. बंगाल छोड़ने जाएगी और विवेचना उपरांत चालान कोर्ट में प्रस्तुत करेगी।
घटना के बारे में देवव्रत ने बताया कि घटना दिनांक 28 फरवरी को गुजरात से पश्चिम बंगाल लौटते वक्त अहमदाबाद ट्रेन की जनरल बोगी में काफी भीड़ थी। ट्रेन में मैं गेट के पास बैठा था। ट्रेन पूरी रफ्तार से खरसिया स्टेशन पार कर रही थी, तभी मेरे साथियों जैनुद्दीन, एसके काची व रणजीत रोहिदास आए और अंदर जगह मिल गई है, कहते हुए मुझे चलने को कहा। जैसे ही मैं उठने को हुआ, तो जैनुद्दीन ने मेरे पेट पर जमकर लात मारी। मैं गिरने लगा पर मैंने गिरते हुए किसी तरह एक हाथ से गेट को पकड़ लिया, इतने में रणजीत रोहिदास ने मुझे धक्का देकर नीचे गिरा दिया। उसके बाद जब मेरी आंख खुली, तो मैंने अपने आपको रायगढ़ जिला अस्पताल में पाया।
मेरे बाएं हाथ की कलाई कट चुकी थी, सिर व शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोट थी। अस्पताल में इलाज के दौरान कुछ लोगों ने मेरी मदद की। बंगलाभाषी होने से हिंदी मुझे समझ में नहीं आती थी, लिहाजा मैंने टूटे-फूटे शब्दों में इशारों से अपने घर का पता बताया। जिससे रायगढ़ पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। मेरे घरवाले यहां आए और मुझे अपने साथ ले गए।
कोर्ट ने की अनुवादक की व्यवस्था
इस मामले में जीआरपी ने कल अदालत को अवगत कराया था कि घायल युवक देवव्रत मंडल को हिंदी नहीं आती, वह बंगला भाषा बोलता है। लिहाजा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ए. टोप्पो के निर्देश पर न्यायिक मजिस्ट्रेट डीएस गणवीर ने एक बंगला अनुवादक के समक्ष देवव्रत का बयान कराकर उसे हिंदी में रुपांतरण कर लिपिबद्ध किया।
क्या थी घटना
कोसपा-पश्चिम बंगाल निवासी देवव्रत पिता सुनील मंडल (20 वर्ष) 26 जून 2002 को गांव के 20-22 युवकों के साथ कमाने-खाने सूरत (गुजरात) गया हुआ था। 1 मार्च 2007 को 8-10 लड़के गांव लौटे, जिसमें देवव्रत के भी आने की सूचना थी। उसके नहीं आने से घबराए पिता सुनील मंडल ने उसकी खोज खबर ली। कुछ पता नहीं चलने पर उन्होंने शंका के आधार पर पश्चिम बंगाल पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पुत्र देवव्रत को गांव के ही मजदूर साथी दीनानाथ सरदार उर्फ बोका, जैनुद्दीन एसके काची, हामिद अली व रणजीत रोहिदास ने लाठी-डंडे से पीट-पीट कर घायल कर दिया व उसे बहते दरिया के पास फेंककर भाग गए। जबकि पिछली 28 फरवरी 2007 को अहमदाबाद ट्रेन में पश्चिम बंगाल लौटते हुए जनरल बोगी में काफी भीड़ होने से धक्का-मुक्की में देवव्रत खरसिया स्टेशन के पास चलती ट्रेन से गिर गया। इस घटना में उसके बाएं हाथ का पंजा कट गया। सिर पर लगी चोट से वह एक माह तक अर्धबेहोशी की हालत में रहा। रायगढ़ अस्पताल में ही उसका इलाज हुआ। बाद में परिजन आकर उसे घर ले गए।
उधर, लापता पुत्र के पिता की रिपोर्ट पर पं. बंगाल पुलिस ने भादवि की धारा 304, 201/34 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जहां 5 माह जेल में रहने के बाद पं. बंगाल पुलिस ने मामला सूरत-गुजरात पुलिस को सौंपा, जहां आरोपी एक माह जेल में रहे। इस बीच रायगढ़ पुलिस से देवव्रत की खरसिया में दुर्घटना होने व उसके जिंदा होने की खबर के बाद गुजरात न्यायालय के आदेश पर मामला रायगढ़ जीआरपी को सौंप दिया गया। वर्तमान में चारों आरोपी रायगढ़ जेल में बंद हैं।