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जीते-जी रस्म पगड़ी करा रस्म तोड़ी

अबोहर. नई आबादी निवासी परमेश्वरी देवी ७क् साल की हो चुकी हैं। उनकी इच्छा थी कि वे मरने के बाद होने वाली क्रियाओं को देखें। परमेश्वरी के बेटों ने मुंबई, हैदराबाद, गुजरात, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर में रहने वाले रिश्तेदारों से बातचीत की और रस्में निभाने की तारीख निर्धारित कर दी।

२ दिसंबर को बुजुर्ग की ‘पगड़ी’ रस्म निभाई गई। इसके बाद बुजुर्ग महिला ने खाना खाया और फिर मेहमानों को खाना खिलाया गया। सारे पकवान देसी घी से बनाए गए थे।

मेरी दिली इच्छा थी.. परमेश्वरी ने बताया कि यह उनकी दिली इच्छा थी कि वह जीते जी अपनी पगड़ी की रस्म देखें। उनके चार बेटे भगवान दास, जगदीश कुमार, सुभाष चौहान व चंद्रभान चौहान हैं और गुड्डी, सावित्री व रूकमा देवी तीन बेटियां हैं। ललित, विक्की, रोहित कुमार उनके पौत्र हैं। जीते जी हो रहे इस कारज पर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। चंद्रभान ने बताया कि इस रस्म पर करीब दो लाख खर्च आया है। लेकिन मां की इच्छा सर्वोपरि है। घर में खुशी का माहौल है।





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