पाली. रोहट पंचायत समिति की ढाबर ग्राम पंचायत में फर्जी बिल बुक के सहारे लाखों रुपए के वारे-न्यारे करने का मामला उजागर हुआ है। 11 लाख रुपए से भी अधिक का भुगतान ग्राम पंचायत ने उस फर्म के बिलों पर किया है जो अस्तित्व में ही नहीं है।
मजेदार बात तो यह है कि बिल ‘मैसर्स संपतराज- कुंभराज’ से जारी किए गए हैं जबकि हकीकत इसके उलट है। गांव में इस नाम की कोई बिल्डिंग मेटेरियल सप्लायर फर्म नहीं है। बिल बुक पर प्रिंट तो संपतराज का नाम है जबकि रकम प्राप्त करने वाला संपतलाल के रूप में अपने हस्ताक्षर कर भुगतान उठा रहा है। इन बिलों पर कोई क्रमांक अंकित नहीं है। कुछ पर तो तारीखें भी नहीं लिखी गई हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरपंच ने आंख मूंदकर इन बिलों को प्रमाणीकृत कर दिया। लगभग हर बिल का प्रमाणीकरण सरपंच की ओर से बिल की तारीख के करीब पन्द्रह दिन की अवधि में किया गया है।
मिट्टी परिवहन में मास्टर उम्मेदसिंह
ग्राम पंचायत में कराए गए कार्य के दौरान जो मिट्टी परिवहन कराई गई। इनमें से अधिकतर एंट्री एकमात्र आदमी उम्मेदसिंह नैनसिंह ढाबर के खाते में दर्ज है। गांव के लोगों से पता चला कि उम्मेदसिंह और कोई नहीं बल्कि स्वयं सरपंच का भाई ही है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत अधिकांश मिट्टी परिवहन का कार्य इसके माध्यम से ही कराती है।
* मैने डेढ़ माह पूर्व ही ढाबर ग्राम पंचायत का कार्यभार संभाला है। वे इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। यह फर्म है या नहीं, वे पता लगाएंगे।
—रामेश्वरलाल भार्गव, ढाबर
* इस बारे में शिकायत नहीं मिली है। अगर ऐसा हुआ है तो गलत है। शिकायत प्रमाणित होने पर कार्रवाई की जाएगी।
—रामपाल शर्मा, जिला परिषद, पाली
* ग्राम पंचायत की ओर से टेंडर निकाला गया था। उसी के तहत भुगतान किया गया है।
—बाबूसिंह राजपुरोहित, सरपंच, ढाबर
* सरकारी एजेंसी को किसी प्रकार की सामग्री सप्लाई करने वाली फर्म आरएसटी नंबरशुदा होनी चाहिए। इसके अलावा भी पांच लाख से अधिक का कारोबार करने वाली फर्म को कानूनन यह नंबर देना जरूरी है।
—राजेश दवेरा, कर सलाहकार, पाली