जयपुर. ‘वे जुनूनी इंसान हैं। काम उनके लिए पूजा है। जिस मिशन के पीछे लगे मान लीजिए पूरा होना ही है। डॉ. तीरथदास के एम्स के डायरेक्टर बनने के साथ
ही अब देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान से राजस्थान का नाम भी जुड़ गया है। उनके मित्रों का मानना है कि सही मायने में वे ‘जैम ऑफ ए मैन’ हैं।
एम्स के कार्यवाहक डायरेक्टर बनाए गए डॉ. तीरथदास डोगरा ने 35 साल पहले सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर से एमबीबीएस की डिग्री ली थी। जयपुर में रहने वाले उनके करीबी मित्र डॉ. रवींद्र मनोहर कहते हैं कि यह पद उनकी लगन और समर्पण साबित करता है। अब राजस्थानी लोगों को भी एम्स में तवज्जो मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि डोगरा लंबे समय तक यह जिम्मेदारी संभालेंगे। डोगरा के पिता प्रेमनाथ डोगरा का भी सीकर से वास्ता रहा है और वे काफी समय तक यहां रहे हैं।
एम्स में फिजियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. महापात्र का कहना है, ‘वे एप्रोचेबल हैं और चिकित्सा संस्थान में कार्य प्रणाली को नई दिशा मिलेगी। वे इतने सरल हैं कि हर कोई उनसे आसानी से मिल सकता है।’
ऐसे भी रहा है जुड़ाव
डॉ. डोगरा कई वर्ष तक प्रदेश में एमबीबीएस, एमडी, फोरेंसिक मेडिसिन के परीक्षक रहे हैं। राजस्थान लोकसेवा आयोग में भी उन्होंने फोरेंसिक मेडिसिन के कई इंटरव्यू लिए हैं।
पूर्व पीएम का किया था पोस्टमार्टम
डॉक्टर डोगरा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेसी नेता माधवराव सिंधिया का भी पोस्टमार्टम किया था। इसके अलावा वे निठारी कांड के मेडिको लीगल एक्सपर्ट रहे हैं। नैना साहनी तंदूर कांड के बाद गठित मेडिकल बोर्ड के सदस्य रहे हैं।
यादें नेपाल के इंस्टीट्यूट की
डॉ. मनोहर 1995 में डेपुटेशन पर नेपाल के बीपी कोइराला इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ साइंसेज में नियुक्त हुए। वे बताते हैं कि दो साल बाद डॉक्टर डोगरा भी फोरेंसिक विभाग के हैड बनकर आए। दोनों राजस्थानी इस कदर घुल मिल गए एक-दूजे के बिना नहीं रह पाते। जब भी डोगरा कहीं पोस्टमार्टम के लिए जाते वे उन्हें साथ ले जाना नहीं भूलते। उनके चेहरे पर तनाव कभी नहीं दिखा। कई तनावग्रस्त आदमी उनके पास बैठकर तनावमुक्त हो गए।