उदयपुर. भविष्य में पौधों को जरूरत के हिसाब से खाद-पानी की आपूर्ति कंप्यूटर सिस्टम के जरिए होगी। यहां महाराणा प्रताप कृषि और राजस्थान कृषि महाविद्यालय
(प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) में इस तकनीक से कृषि की जा रही है। यह तकनीक बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति पर आधारित है। इस कृषि तकनीक से रेगिस्तानी व कम वर्षा वाले इलाकों में खेती की संभावनाएं बढ़ी हैं। इस तकनीक से खेती श्रमिकरहित भी है। फिलहाल इस तरह की आधुनिक तकनीक आधारित खेती इजराइल व अमेरिका में की जा रही है।
महाविद्यालय के फार्म में कृषि के आधुनिकीकरण को लेकर ये प्रयोग पिछले डेढ़ साल से चल रहे हैं। डेढ़ महीने से यहां कंप्यूटर नियंत्रित कृषि पर अनुसंधान किया जा रहा है। कॉलेज की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि होर्टिकल्चर फार्म को मॉडर्न कृषि फार्म में विकसित कर कंप्यूटर नियंत्रित खेती करने का उत्तर भारत में यह पहला मौका है। इस फार्म में पौधों को विकसित करने की जिम्मेदारी किसानों व श्रमिकों के बजाय कंप्यूटर की होगी। सेंसर सिस्टम पौधों को खाद व पानी की जरूरत बताएगा और आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका भी कंप्यूटर निभाएगा।
विवि के कुलपति डॉ.एस.एल.मेहता ने दावा किया है कि जल संवर्धन की दिशा में यह पद्धति काफी कारगर है। फसलों की सिंचाई व खाद सभी निर्धारित मात्रा में मिलने से उत्पादन में भी वृद्धि होगी। मेहता के निर्देशन में उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ.आर.ए. कौशिक व डॉ.ए.के.शुक्ला इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
वर्टीकल खेती होगी
अब तक होरिजेंटल (आम तौर पर क्यारियां बनाकर की जाने वाली) खेती देखने को मिलती है लेकिन महाविद्यालय के होर्टिकल्चर फार्म पर वर्टीकल खेती की जाएगी। पॉली हाउस में रैक्स बनाकर वर्टीकल तरीके से खेती की जाएगी।
सिस्टम के फायदे :
- पानी की बचत होगी।
- सिंचाई व उर्वरक निर्धारित मात्रा में मिलने से फसल की पैदावार बढ़ेगी।
- कम समय व बिना श्रमिक के कृषि कार्य हो सकेगा।
कैसे मिलेगा पौधों को खाद-पानी
फार्म के एक हिस्से में पानी व तरल खाद के दो टैंक होंगे। इनकी नलियां पौधों तक जाएंगी। पानी व तरल खाद का निकास कंप्यूटर सिस्टम से कंट्रोल होगा। पौधों के पास सेंसर लगाया जाएगा, जो कंप्यूटर से कनेक्ट रहेगा।
खेतों में फसलों को जैसे ही सिंचाई व खाद की आवश्यकता होगी सेंसर कम्प्यूटर को सूचित कर देगा और खाद व पानी के टैंकों के नल स्वत: ही खुल जाएंगे। फसलों को नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश खाद लिक्विड रूप में मिलेगी। फसलों को माइक्रो न्यूट्रेन भी मिल सकेंगे। इस सिस्टम के लिए किसी खास कम्प्यूटर की आवश्यकता नहीं है। सामान्य कम्प्यूटर व लैपटॉप भी उपयोग में लिए जा सकते हैं।