जालंधर.
विवाह पंजीकरण सर्टिफिकेट को यहां कुछ दलालों ने कमाई का जरिया बनाया हुआ है। हालत यह है कि सरकारी बाबुओं और दलालों की जेब गर्म करने पर कोई भी जितनी मर्जी चाहे विवाह पंजीकरण सर्टिफिकेट बनवा सकता है। इस घोटाले का खुलासा दैनिक भास्कर के एक स्टिंग आपरेशन में हुआ है।
विदेश में नौकरी करने वाले पति या पत्नी के साथ जाने, एनआरआई पति या पत्नी के साथ विदेश जाने के लिए विवाह पंजीकरण जरूरी दस्तावेज है। इस दस्तावेज के लिए सरकारी फीस मात्र 110 रुपए है, लेकिन दलाल नियमत: बनवाने के लिए 1000 रुपए वसूलते हैं और नियमों को ताक पर रख कर बनवाने के एवज में 3000 रुपए लेते हैं। जितनी जल्दी चाहिए उतने ही रुपए की मांग दलाल करते हैं।
पहले दिन हमने जिस दलालों से संपर्क किया उसने हमें आवासीय प्रमाण पत्र, दो पार्षदों, पति-पत्नी और उनके अभिभावकों के दस्तखत और पति-पत्नी के उम्र संबंधी प्रमाण पत्र लेकर दूसरे दिन आने को कहा। हमने बताया न तो पति यहां रहते हैं और न हम दोनों के माता-पिता।
आवासीय प्रमाण भी नहीं है और न ही हमें कोई पार्षद जानता है। उसने कहा कि इसके लिए कितने पैसे लगेंगे यह वह कल ही बताएगा।
दूसरे दिन हमने दूसरे दलाल से फोन पर बात की। उसने भी उन्हीं कागजों की मांग की जिनकी मांग पहले ने की थी। हमने उससे भी वही कुछ दोहराया जो पहले से कहा था।
यह पूछने पर कि पति व अभिभावकों के दस्तखत का क्या करेंगे उसने एक फार्म दिया और पति, सास, ससुर और अपने अभिभावकों का दस्तखत करने को कहा। हमने उस फार्म पर सभी के सही से दस्तखत भी नहीं किए। फिर बात शुरू हुई पैसों की। उसने बताया कि इस काम के वह 3500 रुपए लेगा। मोलतोल करने पर वह 2500 रुपए पर तैयार हो गया और सर्टिफिकेट बन गया।
एक सर्टिफिकेट के रहते कैसे बना दूसरा राकेश बहल जालंधर : स्टिंग में शामिल पत्रकार का विवाह पंजीकरण सर्टिफिकेट पहले से बना हुआ है। सरकार के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जिसके जरिए पता लगाया जा सके कि सर्टिफिकेट पहले बनवाया जा चुका है। इसके अलावा जिस तरह की लूटखसूट मची हुई है उससे कई सवाल खड़े होते हैं।
>> नियमानुसार फार्म पर पति-पत्नी, दोनों के अभिभावकों और दो पार्षदों को डीसी ऑफिस आकर संबंधित अधिकारी के सामने ही दस्तखत करना होता है। पत्रकार ने सारे परिवार के साइन कर दिए, किसी ने इसे क्रॉस चैक क्यों नहीं किया? >> रिपोर्टर न तो यहां की रहने वाली है और न उसके माता-पिता व सास-ससुर यहां रहते हैं तो उसका आवासीय प्रमाण कैसे मान्य हो गया? >> यह रजिस्ट्रेशन बाल विवाह और बहुविवाह रोकने के लिए अनिवार्य है? कौन कितने सर्टिफिकेट्स बनवा रहा है? जब प्रशासन के पास इसकी जानकारी ही नहीं है तो उद्देश्य कैसे हासिल होगा? >> ऐसे में कोई एनआरआई ज्यादा शादियां कर उसे कहीं भी रजिस्टरकरवा लेगा और विदेश भाग जाएगा। >> कबूतरबाजी को अंजाम देने के लिए एक से ज्यादा सर्टिफिकेट बनवाना किसी के लिए मुश्किल नहीं।
मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री बनने के बाद जिला प्रशासन में भ्रष्टाचार को सख्ती से रोकने का निर्देश दिया था। यह पहला मामला प्रकाश में आया है, इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
-प्रकाश सिंह बादल, मुख्यमंत्री, पंजाब