अमृतसर.
अगर दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो फिर कोई भी मुश्किल आड़े नहीं आ सकती। हौसला ही सफलता का मूल मंत्र है। हौसले के आगे विकलांगता भी बौनी साबित हो जाती है। इसे शहर के कई लोग साबित कर चुके हैं। वल्र्ड डिसएबिलिटी डे को लेकर रिपोर्टर पिंकेश शर्मा ने शहर के ऐसे लोगों से बात की, जिन्होंने विकलांग तो कभी अपनी सफलता के मार्ग में नहीं आने दिया।
म्यूजिक को बनाया आंखें आतंकवाद के दौरान 1992 में राजेश शर्मा की आंखें चली र्गई, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और म्यूजिक में डबल एमए कर नेट क्लियर किया। पिछले छह सालों से वह म्यूजिक डिपार्टमेंट में लेक्चरर हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कामयाबी में उनके परिवार के सदस्यों का बहुत योगदान है। उन्होंने बताया कि अब संगीत ही उनकी आंखें हैं।
हैंडीक्राफ्ट एग्जीबिशन लगाई अर्चना गोयनका के दोनों पैर खराब हैं और हाथों में भी थोड़ी बहुत प्रॉब्लम। इस कारण वह स्कूल नहीं गई, लेकिन उन्होंने घर बैठे ही अपने अंदर छिपे टेलेंट को निखारा। उन्होंने घर बैठे-बैठे हैंडीक्राफ्ट्स बनाने शुरू किए। वह एसजी ठाकर सिंह आर्ट गैलरी में अपने हैंडीक्राफ्ट्स की एग्जीबिशन भी लगा चुकी हैं।
किसी पर निर्भर नहीं दोनों आंखों से ब्लाइंड स्वर्ण कुमार मूल रूप से हिमाचल के रहने वाले हैं और पिछले दस साल से यहां अंध विद्यालय में रह रहे हैं। वह डस्टर बनाते हैं। इससे जो भी कमाई होती है, उसे वह बच्चों में बांट देते हैं।