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भ्रूण हत्या के आरोप में क्लीनिक सील

तरनतारन. सेहत विभाग ने वल्टोहा क्षेत्र के एक प्राइवेट क्लीनिक को भ्रूण हत्या और लिंग निर्धारण टैस्ट करने के आरोप में सील कर दिया है। विभागीय जांच के भ्रूण हत्या के आरोप में क्लीनिक सीलबाद पुलिस ने क्लीनिक की संचालिका सहित दो लोगों पर केस दर्ज किया है। दोनों आरोपी फरार हैं। थाना वल्टोहा प्रभारी ने क्लीनिक के नाम का खुलासा नहीं किया।

गांव कोरली वसावा सिंह निवासी राज कौर पत्नी प्रताप सिंह ने क्षेत्र में अवैध रूप से क्लीनिक खोल रखा था। क्लीनिक में गुप्त तरीके से लिंग निर्धारण टैस्ट और भ्रूण हत्याएं की जाती थी। इसके अलावा क्लीनिक चलाने के लिए आरोपियों ने कोई लाइसैंस भी नहीं ले रखा था। क्षेत्रवासियों ने सेहत विभाग से इस संबंध में शिकायत की थी। आईएनटीपीबी के एडीशनल डायरेक्टर जनरल की जांच के बाद क्लीनिक को सील कर दिया गया। डायरेक्टर के आदेश पर पुलिस ने क्लीनिक संचालिका राज कौर और उसके साथी दिलबाग सिंह पुत्र बलबीर सिंह निवासी वल्टोहा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

थम नहीं रही भ्रूण हत्या
कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सरकार भले ही लाख कोशिश क र रही है, लेकिन जमीनी सच्चई कुछ और ही है। वंश वृद्घि के लिए लड़के की ललक में चोरी छिपे कन्या भ्रूण हत्या कराने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस अंधी होड़ में जिला तरनतारन के लोग भी पीछे नहीं हैं। शुक्रवार को सील किए गए अस्पताल के अलावा सिविल सर्जन कार्यालय पहले भी तीन सेंटर सील कर चुका है। बावजूद इसके जिले में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 728 रह गई है।

अनाधिकृत सैंटरों की भरमार: जिले में चलने वाले अल्ट्रासाउंड कें द्रों में मात्र 23 केंद्र ही अधिकृत हैं, जबकि आधा दर्जन से अधिक अवैध तरीके से चलाए जा रहे हैं। ग्रामीण इलाके की दो दाइयों पर भी भ्रूण हत्या में लिप्त होने का मामला दर्ज किया जा चुका है।

ग्रामीण भी पीछे नहीं: पुत्र की चाह में लिंग जांच कराने की बीमारी पहले सुविधासंपन्न शहरों और शहरवासियों तक ही सीमित थी, लेकिन अब इसने गावों में भी पैर पसार लिया है। पुत्री के स्थान पर पुत्र पैदा करने की मानसिकता शहरियों के मुकाबले ग्रामीणों में बढ़ती जा रही है।

कहां हो चुके हैं सेंटर सील: सिविल सर्जन के मुताबिक जिले में श्रीगुरु अजरुन देव अल्ट्रासाउंड सेंटर, सेंट मैरीज अल्ट्रा साउंड सेंटर और कस्बा पट्टी में भी एक सेंटर सील किया जा चुका है।

* सेहत विभाग समय-समय पर सेंटरों की चैकिंग करता है, लेकिन गुप्त तरीके से टैस्ट करने वाले विभाग की नजरों से बच निकलते हैं। उन्हें पकड़ने के लिए जनता का सहयोग जरूरी है।
—डा. विक्रमजीत सिंह, सहायक सिविल सर्जन





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