News
Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. सिम्स के सरकारी होते ही उसमें नौकरी के लिए पैसा और पहुंच की स्पर्धा बढ़ गई है। चर्चा है कि कई असरदार नेता नियुक्ति के जरिए कमाने में जुट गए हैं।
सरकारीकरण के दो दिन पूर्व 28 नवंबर को यहां ग्रंथालय सहायक पद पर एक महिला की नियुक्ति हुई है। इसे बगैर अनुमति नियुक्ति करार देकर विरोध किया जा रहा है। आरोप है कि एक मंत्री के प्रभाव के कारण उसे नौकरी दी गई है।
इसी तरह यूनिवर्सिटी से पूर्व में नौकरी छोड़कर दूसरे यूनिवर्सिटी व अन्य निजी संस्थानों में गए चार युवकों को फिर से एमआरडी में नियुक्त किया गया है। बताया जाता है कि ये भी नेताओं के रिश्तेदार हैं, जो जुलाई माह से यूनिवर्सिटी के चक्कर काट रहे थे। आरोप है कि लेन-देन के बाद अभी इन्हें नौकरी का आश्वासन देकर एमआरडी में नियुक्त किया गया है।
बताया जाता है कि ग्रंथालय सहायक बनाई गई महिला को तत्कालीन कुलसचिव सोनमणि बोरा ने सन् 2004-05 में एक साल के लिए संविदा नियुक्ति दी थी। इसके बाद एक्सटेंशन न होने के कारण उसकी छुट्टी कर दी गई। सिम्स के शासकीयकरण की घोषणा के ठीक पहले इस महिला को पुन: सहायक गं्रथालय के पद पर नियुक्ति दी गई है।
गं्रथालय की उपस्थिति पंजी में भी महिला की नियुक्ति तिथि 28 नवंबर 2007 दर्शाई गई है। यूनिवर्सिटी के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तत्कालीन कुलसचिव के कार्यकाल में महिला ग्रंथालय सहायक के एक्सटेंशन के लिए फाइल भेजी गई थी, जो खो गई थी, इसलिए अभी तक महिला का एक्सटेंशन नहीं हुआ है।
बताया जाता है कि अखबारों में 47 कर्मचारियों को पूर्व तिथि पर नियुक्ति करने का मामला प्रकाश में आने के बाद कुछ अफसर इस मामले से अपना हाथ बचाने का प्रयास कर रहे हैं। मंत्री के दबाव पर 47 कर्मचारियों की नियुक्ति की फाइल पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने वाले डीन डा.एसएम फुसे ने इस महिला के एक्सटेंशन व पुन: नियुक्ति की फाइल स्वीकृति के लिए कुलसचिव के पास भेजा थी, जिसे कुलसचिव ने कुलपति के पास भेज दिया।
इसके बाद कुलपति ने अपना हाथ बचाने के लिए एस फार रूल लिखकर फाइल को डीन के पास भेज दिया। डीन ने कुलपति के हस्ताक्षर के बाद परमिटेड लिखकर गं्रथालय के अफसर व फाइनेंस अफसर के पास भेज दिया, परंतु फाइनेंस अफसर ने फाइल पर यह लिखकर भेज दी कि अब सिम्स शासन का है और संचालक चिकित्सा शिक्षा के अधीन हैं, इसलिए उनकी अनुमति आवश्यक है। डीन ने गत ३ नवंबर को फाइल नियुक्ति की अनुमति के लिए संचालक चिकित्सा शिक्षा को भेज दी है।
बताया जाता है कि अभी और भी उम्मीदवार लाइन हैं। इस मामले में क्या हो रहा है, यह जानने के लिए कुलपति प्रोफेसर जेएल गुप्ता से चर्चा करने का प्रयास किया गया, परंतु उनसे संपर्क नहीं हो सका।
हमारा क्या होगा :
सिम्स के सरकारी होते ही मंत्री, नेताओं व अफसरों के अपने नजदीकी रिश्तेदारों को नौकरी पर फिट करने की कवायद से सिम्स में जिला अस्पताल के जमाने से सेवा देने वाले दैनिक वेतन भोगी व रोगी कल्याण समिति के कर्मचारी चिंतित हैं कि उनका क्या होगा। वे यह खुलेआम यह करते फिर रहे हैं कि वे भी रकम देने तैयार हैं, बशर्ते काम होना चाहिए।
फाइल डीन के पास है। डीन से पूछिए, मुझे याद नहीं है। हा,ं 14-15 दिन से ऐसी फाइल जरूर घूम रही है। मैंने कुलपति को कार्रवाई के लिए भेज दिया था। क्या हुआ, पता नहीं है। - केके चंद्राकर, कुलसचिव, गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी
उक्त महिला कर्मचारी छुट्टी पर थी और उसने २८ नवंबर से फिर से ज्वाइन किया है। ऐसा पता चला है। मंडे को डिटेल पता करेंगे। - डा.एसएम फुसे, डीन, सिम्स