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Chandigarh Chandigarh पटियाला. भवानीगढ़ के शाहपुर गांव के बलबीर सिंह की कस्टोडियल डैथ (हिरासत में मौत) के मामले में दोषी करार दिए नाभा के डीएसपी राजिंदर पाल आनंद
समेत पांच लोगों को कोर्ट ने शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई और साथ ही दोषियों को 46-46 हजार का जुर्माना भी लगाया। छठे दोषी एएसआई जसदेव सिंह को फर्जी सबूत गढ़ने पर दो वर्ष की कैद और एक हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई।
एडिशनल सेशन जज कुलदीप सिंह की कोर्ट में दोषी डीएसपी राजिंदर पाल आनंद, एएसआई जसदेव सिंह, एएसआई राजपाल, कांस्टेबल महिंदर सिंह, कांस्टेबल दर्शन सिंह और कांस्टेबल विनोद कुमार पेश हुए। कोर्ट ने एएसआई जसदेव सिंह को धारा 218 और 120 बी का दोषी करार देते हुए दो वर्ष की कैद और एक हजार जुर्माने की सजा सुनाई जबकि डीएसपी राजिंदर पाल आनंद, एएसआई राजपाल, कांस्टेबल महिंदर सिंह, कांस्टेबल दर्शन सिंह व कांस्टेबल विनोद कुमार को हत्या, अपहरण, बंदी बनाने व सबूतों को मिटाने के लिए उम्रकैद और 46-46 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई।
टार्चर के बाद मिली थी लाश : गांव शाहपुर थाना भवानीगढ़ के मोदन सिंह के बेटे बलबीर सिंह को सीआईए नाभा की पुलिस पार्टी ने जुलाई 1996 में हिरासत में लिया था। चोरी के सामान की बरामदगी को लेकर उसे इतना टॉर्चर किया गया था कि उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। बाद में उसका शव भाखड़ा नहर से मिला था।
बचने के लिए कूदा नहर में!
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बलबीर सिंह को चोरी के बर्तनों की बरामदगी के सिलसिले में ले जाया जा रहा था कि रास्ते में उसने बचने के लिए थूही के पास भाखड़ा नहर में छलांग लगा दी और डूबकर उसकी मौत हो गई।
शरीर पर थे चोटों के निशान
बलबीर की लाश नहर से बरामद होने पर कई गांवों की पंचायतों ने उसके पिता मोदन सिंह के साथ मिलकर नाभा शहर में प्रदर्शन किया और बाजार बंद करवा दिया था। उस समय के एसडीएम ने मामले में दखल देते हुए लोगों को शांत कराया और तीन डॉक्टरों के बोर्ड से लाश का पोस्टमार्टम करवाया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक बलबीर सिंह की रीढ़ की हड्डी टूटी थी और शरीर पर कई जगह चोटें लगी थीं।
सीबीआई को ट्रांसफर हुआ था केस
इसके बाद मोदन सिंह ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके केस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की तो हाईकोर्ट ने केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया था। सीबीआई ने 15 जून 1997 को मामला दर्ज किया था।
हाईकोर्ट में अपील करूंगा : आनंद
डीएसपी राजिंदर पाल आनंद ने कहा कि उन्हें यह फैसला मंजूर नहीं है और वे इंसाफ के लिए हाईकोर्ट जाएंगे। उन्हें पूरा भरोसा है कि हाईकोर्ट में मैरिट के आधार पर उनके केस का फैसला होगा।