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सिख मैरिज एक्ट पर कानूनी मोहर

चंडीगढ़/अमृतसर. आनंद कारज मैरिज एक्ट लागू होना करीब तय हो गया है। मिनिस्ट्री ऑफ लॉ ने इस पर मोहर लगा दी है। शीघ्र ही इस संबंध में संसद में बिल सिख मैरिज एक्ट पर कानूनी मोहरपेश किया जाएगा। संसद से एक्ट के पास होने के बाद यह पूरे देश में लागू हो जाएगा। एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने इसकी पुष्टि की है।

पंजाब सरकार लंबे समय से आनंद कारज मैरिज एक्ट- 1909 के संशोधित रूप को लागू करने की जद्दोजहद में है। पाकिस्तान सरकार ने इस मामले में पहल करते हुए हाल ही में वहां इस एक्ट को लागू करने की घोषणा कर दी। इसके बाद मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर भी यह एक्ट लागू करने का दबाव बढ़ गया था।

अंग्रेजों ने 1909 में बनाया था एक्ट : डीएसजीपीसी के प्रधान परमजीत सिंह सरना के अनुसार भारत-पाक विभाजन से पहले अंग्रेजों ने 1909 में आनंद कारज मैरिज एक्ट लागू किया। आजादी के बाद इसे खत्म कर सिखों को हिंदू मैरिज एक्ट के अधीन कर दिया गया। उन्होंने कहा, प्रस्तावित एक्ट के प्रारूप में सिख की परिभाषा, शादी की उम्र, शर्तें व तलाक का उल्लेख है।

सरना के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा शादियों की रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने से सिखों की शादियां हिंदू मैरिज एक्ट के अधीन रजिस्टर्ड होंग, जो हमें मंजूर नहीं।

शादी के लिए उम्र : युवक और युवती की उम्र 18 साल से कम नहीं हो जबकि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए। शादी के समय दोनों में से किसी की भी पत्नी या पति न हो। मानसिक तौर पर स्वस्थ हों।

आनंद कारज समारोह
* सिखों ने अलग से आनंद कारज एक्ट लागू करने के लिए आनंद कारज और सिखी को परिभषित कर रखा है। गुरु ग्रंथ साहिब की मौजूदगी में सिख युवक और सिख युवती की शादी होती है। * इसमें चौथे गुरु राम दास द्वारा राग सूही में रचित चार लावां पढ़ी जाती हैं।

यह है सिख की परिभाषा
* जो अकालपुरुख, गुरु नानक देव से गुरु गोबिंद सिंह तक दस गुरुओं और गुरुग्रंथ साहिब पर पूर्ण विश्वास रखता हो और दूसरे किसी धर्म में आस्था न हो। * कोई भी बच्चा जो सिख दंपती के यहां पैदा हुआ हो।





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