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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा आयोजित तानसेन समारोह की प्रथम संगीत सभा का श्रीगणोश शुक्रवार को तानसेन सम्मान से अलंकृत गोकुलोत्सव महाराज द्वारा प्रस्तुत राग-रागनियों के बीच हुआ।
उन्होंने राग शुद्ध कल्याण से अपने गायन का आरंभ किया। इस मंगलमय राग की ध्वनि जब संगीत रसिकों के कानों से होते हुए हृदय तक पहुंची तो उनका रोम-रोम प्रफुल्लित हो उठा। संपूर्ण वातावरण उल्लासमय हो उठा और वातावरण में किसी उत्सव का उल्लास समाहित हो गया।
इसके बाद उन्होंने राग माला में स्वरचित बंदिशों को अपने कंठ पर सजाया। बंदिश के बोल थे-‘जिस देश में बहत जल गंग, यमुना नदी पवित्र’। उन्होंने अपने मधुर और सधे हुए स्वर में जब देश की गौरवमय महिमा का बखान करती हुई यह बंदिश वातावरण में गुंजायमान हुई तो श्रोताओं का हृदय स्वत: गौरवान्वित सा हो उठा।
अगले क्रम में उन्होंने प्राचीन पद्धति में राग मधुर ध्वनि में रंगमहल में गोपाल नायक द्वारा गाया गया वह ध्रुपद सुनाया, जिसकी मधुरता से बैजू बाबरा हो गए थे। ध्रुुपद की बंदिशें थीं-‘रंगमहल में दोऊ गुणी बैठे’। यह रचना सुन श्रोताओं को यह अहसास हुआ, जैसे वह राजा मानसिंह के रंगमहल में आ गए हों, जिसके कण-कण में संगीत प्रवाहित हो रहा है।
उनके साथ गायन में सहयोग कर रहे थे उनके पुत्र पंडित बृजोत्सव। जब तक वह मंच पर विराजमान रहे, श्रोतागण सम्मोहित भाव से उनकी गायकी में डूबते-उतराते रहे। उनके स्वरों में स्वयं को खोते रहे और अंत तक आनंद महसूस करते रहे। हारमोनियम पर उनके साथ संगत की विनय कुमार मिश्र ने। तबले पर पंडित सोमनाथ मुखोपाध्याय, पखावज पर पंडित लक्ष्मीनारायण पवार, तानपुरे पर विनोद कटारे तथा यमुनेश नागर ने साथ दिया।