पानीपत. प्रदेश में बाल विवाह की जानकारी होते हुए भी अधिकारी पूरी तरह मौन बने हुए हैं। ऐसा खुलासा विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों से ही हुआ है। कल्याण विभाग द्वारा इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी विवाह शगुन योजना के तहत जिले से साल भर में 518 आवेदन मिले थे। जांच के बाद विभाग ने 504 आवेदकों को योजना के तहत चैक वितरित किए, मगर 14 आवेदनों को अयोग्य घोषित कर दिया।
चार आवेदन तो इसलिए अयोग्य घोषित कर दिए गए क्योंकि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम थी। पांच आवेदकों ने आयु प्रमाण पत्र नहीं लगाया था।
क्या हो सकती है कार्रवाई
बाल विवाह होने से पहले या बाद में प्रशासन के पास पुख्ता जानकारी होने पर मामला दर्ज किया जा सकता था। बाल विवाह कानून के तहत आरोपी अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती थी। जिला कल्याण विभाग को शगुन योजना का लाभ लेने के लिए अंजू पुत्री बृजपाल, पूनम पुत्री बृजपाल निवासी गांव सिंबलगढ़, कांता पुत्री सोहनबीरा व रानी पुत्री रमेश निवासी कुराड़ का आवेदन शादी के दिन उम्र कम होने के कारण अयोग्य घोषित किया गया है, जबकि सुमन पुत्री जसवंत निवासी डाहर, सोमवती पुत्री भीम सिंह निवासी बिजावा, लिछमी पुत्री राजेन्द्र, आशा पुत्री कृष्णलाल, गीतूबाला पुत्री शिवदत्त व रीना पुत्री महाबीर के आवेदन आयु प्रमाण पत्र पेश न करने पर रद्द कर दिए गए।
* बाल विवाह होने की पुख्ता जानकारी प्रशासन को होने पर अभिभावक के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है। बाल विवाह अधिनियम के तहत आरोपी की तीन साल की सजा हो सकती है।
-जितेन्द्र कुमार, एडवोकेट सोनीपत
* अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अब संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट लेकर जो भी उचित कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।
-वीरेंद्र सहरावत, सीटीएम पानीपत