जालंधर कैंट. शुक्रवार को डीएमसी अस्पताल में दोपहर करीब 12 बजे एक युवक को मृत घोषित कर दिया गया। वह युवक शाम तीन बजे जीवित पाया गया। बाद में अस्पताल ने उसे छुट्टी दे दी और घर पहुंचने के बाद देर शाम उसकी छाती में दोबारा दर्द हुआ। फिर उसे जौहल अस्पताल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया। यह युवक एकता नगर फेस टू का रहने वाला था।
लुधियाना के डीएमसी में दाखिल मोहन लाल को दोपहर 12 बजे डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। मोहन लाल के मरने की खबर मिलते ही परिजनों ने विलाप शुरू कर दिया। पिता जोगिंदर लाल ने अपने परिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों को बेटे की मौत बारे में सूचित कर दिया। लोग शोक व्यक्त करने उसके घर पहुंच गए और उसके दाहसंस्कार के लिए लकड़ियां भी शमशाम घाट पहुंचा दी गई, लेकिन तभी तीन बजे यह खबर आ गई कि वह जिंदा है। इसके बाद माहौल ख्रुशनुमा हो गया।
साले ने बताया, जीजा जिंदा है
मोहन के साले दीपक कुमार ने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंचा तो उसकी बहन विलाप कर रही थी। मोहन के पिता जोगिंदर ने उसे पास बुलाया और कहा कि डाक्टरों ने उन्हें दस हजार रुपए जमा करवाकर डैड बाडी ले जाने के लिए कहा है। दीपक कमरे में गया, उसने देखा कि मोहन की सांसें चल रही हैं। इस पर उन्होंने डाक्टरों को सूचित किया और डाक्टरों ने उसे सांस की मशीनें लगा दी। कुछ देर इलाज के बाद मोहन लाल को छुट्टी दे दी गई।
ढोल-धमाके के साथ पहुंचा घर
लुधियाना से मोहन को ढोल-धमाके के साथ रामामंडी लाया गया। उसके घरवालों और रिश्तेदारों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। लोग भी उसे देखने के लिए आ रहे थे। उसकी पत्नी ममता रानी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, लेकिन बाद में उसकी खुशियों पर पानी फिर गया।
सुलगते सवाल
* जिंदा था तो मृत कैसे घोषित किया।
* बीमार था तो छुट्टी कैसे दे दी।
* दोबारा छाती में दर्द से मौत हुई तो इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन?