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प्रदेश सरकार को 33% मार्क्‍स

भोपाल. मध्यप्रदेश के लोग सरकार के कामकाज से न तो बेहद खुश हैं और न ज्यादा नाराज। लेकिन सामूहिक रूप से सरकार के लिए खुशी की खबर यह है कि शिवराजसिंह चौहान चार साल में बेहतर मुख्यमंत्री के रूप में जनता जनार्दन को स्वीकार्य हैं।

इसके साथ ही नागरिकों की नजर में सरकार का प्रदर्शन कुलमिलाकर औसत रहा है। यानी शिवराज औसत सरकार के बेहतर सीएम के रूप में उभरकर सामने आए हैं। भाजपा सरकार के चार साल पूरे होने पर दैनिक भास्कर द्वारा पूरे प्रदेश में कराए गए खास सर्वे से यह तथ्य उभरकर सामने आए हैं।

इस सर्वे में मुद्दों और मंत्रियों से जुड़े सात सवालों पर लोगों के मन को टटोला गया। जो नतीजे आए, वे सरकार को कहीं खुशी तो कहीं गम की तरह लग सकते हैं। भाजपा के लिए कर्कश डंपर राग के समय सरकार को सबसे बड़ी राहत की खबर यही है कि प्रदेश के 50.75 फीसदी लोग शिवराजसिंह चौहान को बतौर मुख्यमंत्री बेहतर मानते हैं।

चार साल के पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों के विकल्पों के बीच इस सर्वे के नतीजों में शिवराज का नाम सबसे ऊपर उभरकर सामने आया है। उनके बाद बाबूलाल गौर को 29.75 और उमा भारती को 19.5 फीसदी लोगों ने बेहतर सीएम माना है। सरकार के परफार्म्ेस के सवाल पर लोग उदासीन भाव से राय देते नजर आए।

43.75 फीसदी लोगों की नजर में इसका जवाब ‘औसत’ रहा है। वैसे सरकार को ‘कमजोर’ कहने वाले केवल 13 फीसदी लोग हैं, जबकि ‘अच्छा’ मानने वाले 28.37 फीसदी और ‘बहुत अच्छा’ मानने वाले 14.87 फीसदी।

अपने-अपने अंचल में अव्वल :
कोई भी मंत्री प्रदेश स्तर पर लोकप्रियता में अव्वल नहीं आया, लेकिन अपने-अपने इलाकों में वे जरूर लोकप्रियता में अव्वल हैं। सर्वे में शामिल मंत्रियों में कैलाश विजयवर्गीय, राघवजी भाई, अनूप मिश्रा और गोपाल भार्गव अपने क्षेत्रों में लोगों की पहली पसंद हैं।

विभाग बदलने से मंत्रियों का प्रदर्शन कैसा रहा? 33.62 फीसदी जयंत मलैया को इस श्रेणी में सबसे बेहतर मानते हैं। उनके बाद हिम्मत कोठारी को 27.62, अजय विश्नोई को 23.62 और नरोत्तम मिश्रा को 15.12 फीसदी लोगों ने पसंद किया है।

मुद्दे की बात..
सड़क, पानी और बिजली के मुद्दे पर 2003 में सत्ता पर सवार हुई भाजपा के लिए चार साल बाद ये मुद्दे खतरे की घंटी बजा रहे हैं। लेकिन भ्रष्टाचार का मसला ज्यादा गंभीर है, जो जनता ज्यादा गंभीरता से ले रही है। कानून और व्यवस्था जनता की दूसरी चिंता है, तीसरे नंबर पर बिजली, पानी और सड़क को माना गया है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा चौथे नंबर पर है।जनता की ओर से ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट को सरकार की सफलता में शुमार किया गया है, वहीं डंपर की गड़गड़ाहट राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से बाहर आम जनता के कानों तक भी गई है। सड़क, पानी और बिजली के मोर्चे पर सरकार को विफल मानने वालों की राय में डंपर भी सत्ता के सफर में उसे बाधक सिद्घ हो सकते हैं। किसानों की नाराजी और बिजली की परेशानी को सरकार की कमजोरी माना गया है।

सातवां सवाल आम आदमी के जीवन स्तर से जुड़ा है, जिसके नतीजे सरकार के लिए विचारणीय हैं। जितने लोगों ने जीवन स्तर में सुधार के पक्ष में अपनी राय दी है, उतने ही लोग मानते हैं कि कोई बदलाव नहीं आया। तीसरा विकल्प तीसरे नंबर पर है यानी कोई सुधार हुआ नहीं है।

कैसे हुआ सर्वे..
दैनिक भास्कर ने सात सवालों पर जनता का फीड बैक लिया। ये सवाल नए नहीं है और रोजमर्रा की जिंदगी में आम आदमी की चिंता और चर्चा का विषय रहे हैं। करीब तीन हजार लोगों की राय ली गई। इस तरह 48 जिलों से आए आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

चार साल में तीन सीएम देने वाली भाजपा के लिए इसके निष्कर्ष नए साल में आत्मविश्लेषण में मददगार साबित हो सकते हैं। नतीजे बताते हैं कि जनता की नजरों से कुछ भी छिपा हुआ नहीं है। जो बेहतर है वह भी उसकी नजर में है और जो गलत है उस पर भी उसकी निगाह पैनी है। करीब एक सप्ताह की इस रायशुमारी पर संक्षेप में यही कहा जा सकता है-ये पब्लिक है, सब जानती है..।





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