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चार साल बेहिसाब

vasuजयपुर: सर्वे के बाद पूछे सवालों में पाठकों ने सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया इस बात पर दी कि सरकार के विरुद्ध विपक्षी दल कांग्रेस की भूमिका शून्य जैसी रही। साथ ही रोचक टिप्पणी यह भी आई कि सरकार में इतना विरोधाभास है कि विपक्ष की जरूरत ही नहीं। लोगों का कहना है कि चार साल के कामकाज के बाद कोई ऐसी चीज उभरकर नहीं आ रही जिसका हिसाब लगाया जा सके।

भास्कर ने सर्वे में शामिल लोगों से फोन करके दस सवाल पूछे। जिन लोगों ने सरकार के काम को निराशाजनक बताया, उनसे सरकार की सबसे बड़ी विफलता, कौन से विवाद याद हैं जैसे दस सवाल पूछे गए। जिन लोगों ने सरकार के कामकाज पर संतोष जताया, उनसे चार साल में राजस्थान ने क्या पाया, सरकार की सबसे बड़ी सफलता जैसे प्रश्न पूछे गए। सर्वे के संपूर्ण नतीजे मंगलवार के अंक में प्रकाशित किए जाएंगे। सांप्रदायिक सौहार्द सरकार की बड़ी सफलता माना गया। नई सरकारी नौकरियां और सड़कें सरकार के लिए प्लस प्वाइंट रही। बिजली आपूर्ति और कटौती नहीं करना भी चर्चा में रहा।

बिजली खरीद और ट्रांसफार्मर खरीद घोटाला भी लोगों को याद है। सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा मामला गुर्जर-मीणा विवाद बताया गया। जमीनों के भ्रष्टाचार, मुख्यमंत्री पर लगे आरोप, मंत्रियों के विवाद और गोलीकांडों पर लोग खुलकर बोले।

सरकार के पक्ष में बोले लोग

..और इन्होंने फ्लॉप बताया
मंत्री जनता के दुख-दर्द समझने के बजाय जमीनों के कारोबार में लगे हैं। 90 बी में पैसों के बल पर धांधली। सरकार पानी, बिजली व शिक्षा के बजाय हेलिकॉप्टर, प्रचार-प्रसार, सम्मेलन पर बेकार पैसा खर्च कर रही है। मुख्यमंत्री और मंत्री रजवाड़ों की तरह ऐशो-आराम से रहना चाहते है, जनता से दूरियां बढ़ी है। आंदोलन में जनता की समस्या को शांति से निपटाने के बजाय गोलियां चलाई गई, जो संवेदनहीनता है।तबादलों में भ्रष्टाचार चरम पर। लोग पैसों के बल पर मनचाही जगह लग जाते हैं। सरकार चार-पांच मंत्रियों व अफसरों के इर्द-गिर्द घूम रही है।अफसरों को एपीओ रखने के मामले में भी रिश्वत की बू आती है। जमीनों के कारोबार ने आम आदमी के मकान का सपना तोड़ दिया है। अमीर व गरीब की खाई बढ़ी है। सरकार व मंत्री संवेदनहीन है। पानी से हुई मौतों के मसले पर जनता को ही झूठा बता रहे है। मंत्री कमाई को लेकर आपस में लड़ रहे है। जनता की समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं है।





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