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‘कड़कनाथ मुर्गा और खुशहाली की बांग’

जयपुर: मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को ‘उदीयमान राजस्थान’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया तो वहां कड़कनाथ मुर्गा और खुशहाली की बांग का जुमला जमकर गूंजा। राजस्थान सरकार की चार साल की उपलब्धियों संबंधी पुस्तिका ‘उजालों के इंद्रधनुष’ में कड़कनाथ मुर्गे पर पूरा एक अध्याय है।

मुख्यमंत्री ने मंच पर आकर जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी की गई दो पुस्तिकाओं का विमोचन किया। जैसे ही उन्होंने ‘उजालों के इंद्रधनुष’ का विमोचन किया तो उसकी प्रतियां लेकर लोग पन्ने पलटने लगे। पुस्तिका में पहला पन्ना पलटते ही अध्याय खुला ‘खुशहाली की बांग’, जिसमें बताया गया है कि बांसवाड़ा के लोगों ने मुख्यमंत्री की प्रेरणा से कितनी तरक्की की है। कड़कनाथ मुर्गा प्रदेश के लिए खुशहाली की बांग देने वाला है, पूरे अंचल में खुशहाली का पैगाम लाने वाला है।

चुनाव हरवा दिया था इसी कड़कनाथ ने गौरतलब है कि कड़कनाथ मुर्गे के चक्कर में पार्टी डूंगरपुर उपचुनाव हार गई थी। सरकार के ज्यादातर मंत्री इस उपचुनाव में कड़कनाथ मुर्गे की पार्टियों में व्यस्त हो गए थे। ‘खुशहाली की बांग’ में बताया गया है कि कड़कनाथ मुर्गा खाने से मिलेलिन, हिमोग्लोबिन और लौहतत्व की पूर्ति होती है।

कहां से आया कड़कनाथ मुर्गा राज्य सरकार के प्रचार विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कड़कनाथ मुर्गा मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में पाया जाता है और इसे वहीं से लाया गया है। मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से सिरे चढ़ी इस योजना के तहत बांसवाड़ा जिले सहित पूरे आदिवासी अंचल में एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई है। सरकार ने कड़कनाथ मुर्गे के चूजों का एक फार्म खोलने का भी एलान किया है।





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