अजमेर: घूघरा में 53 नाबालिग जोड़ों का विवाह के मामले में शुक्रवार को जहां गांववालों के साथ गुर्जर नेता तंवर परिवार के बचाव में आगे आए वहीं प्रशासन भी जांच के बहाने लीपा-पोती में जुट गया।
प्रशासनिक जांच में ग्रामीणों ने बाल विवाह होने से इनकार करते हुए बछड़े - बछड़ी की शादी और धार्मिक सम्मेलन होना बताया है। गुर्जर नेता अब ग्रामीणों पर उनके बताए अनुसार बयान देने और प्रशासन पर जांच रफा-दफा करने का प्रयास कर रहे हैं। सहायक कलेक्टर मेघना चौधरी शुक्रवार सुबह जांच करने पुलिस दल के साथ घूघरा गांव पहुंचीं। वहां पहले से मौजूद गुर्जर नेताओं हरिसिंह गुर्जर, किशन गुर्जर और सौरभ बजाड़ ने गवाही के लिए लोगों को बुला रखा था।
जांच अधिकारी को दिए बयान में दुकानदारों और ग्रामीणों ने बताया कि बाल विवाह नहीं हुए थे। उन्होंने विवाह के कार्ड बांटे जाने और बारात निकलती देखने तक से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि तंवर परिवार ने समाज में प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए बावनी कर धार्मिक अनुष्ठान व भोज का आयोजन किया था। ग्रामीणों ने कहा कि बावनी में तंवर परिवार ने बछड़े-बछड़ी का विवाह जरूर किया था।
जांच अधिकारी ने पहले दिन करीब 25 लोगों के बयान दर्ज किए। इस दौरान गुर्जर नेताओं ने जांच करने गए अफसरों को विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि बाल विवाह नहीं हुआ। उन्होंने करीब 20 ग्रामीणों को समझाकर बयान दिलाए। इस अवसर पर तहसीलदार श्रीकिशन सारस्वत और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।