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Astro Speak Astro Speak ग्रह दशा. शनि की साढ़ेसाती व ढैया के बारे में हम अक्सर सुनते हैं। यह साढ़ेसाती व ढैया है क्या? जन्मकुंडली में जिस राशि में ‘चंद्रमा’ स्थित होता है, वही
व्यक्ति की जन्मराशि होती है। राशियों के क्रम को हम मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन के रूप में जानते हैं, जबकि अपनी गति के अनुसार नौ ग्रह इन बारह राशियों में लगातार भ्रमण करते रहते हैं।
शनि एक राशि में अढ़ाई साल रहता है। यह जब भी व्यक्ति की जन्मराशि से पहले की राशि में प्रवेश करता है तो उस व्यक्ति को साढ़ेसाती आरंभ हो जाती है, इसे ‘चढ़ती’ साढ़ेसाती कहते हैं। यह साढ़ेसाती की पहली स्टेज है। जब शनि जन्मराशि में प्रवेश करता है तो उसे ‘हृदय’ पर की साढ़ेसाती कहते हैं, यह दूसरी स्टेज है। जब शनि जन्मराशि से अगली राशि में प्रवेश करता है तो इसे ‘उतरती’ साढ़ेसाती कहते हैंै, यह साढ़ेसाती की तीसरी और अंतिम स्टेज है। जन्मराशि से शनि जब चौथी व आठवीं राशि में प्रवेश करता है तो उन राशि वालों को ढैया लागू हो जाती है।
मकर व कुंभ शनि की स्व राशियां हैं, जबकि शनि तुला राशि में उच्च व मेष राशि में नीच होता है। बुध व शुक्र शनि के मित्र और सूर्य, चंद्र व मंगल इसके शत्रु हैं, जबकि गुरु इसका सम है। अपनी या अपने मित्र की राशि में तथा अपनी उच्च राशि में स्थित ग्रह सामान्यत: शुभ फल, जबकि अपने शत्रु की राशि व अपनी नीच राशि में स्थित ग्रह सामान्यत: अशुभ फल देते हैं। यदि जन्मकुंडली में शनि शुभ हो तो साढ़ेसाती व ढैया में विशेषकर शनि की दशा में शुभ फल मिलते हैं, परंतु यदि शनि जन्मकुंडली में अशुभ हो तो साढ़ेसाती, ढैया तथा इसकी दशा में भय, चिंता, रोग, बदनामी व्यवसाय में हानि, पुत्र, स्त्री को पीड़ा इत्यादि अशुभ फल देते हैं। अशुभ शनि की दशा में एकाग्रचित होकर हनुमान चालीसा का पाठ व सुपात्र को उड़द दान करने से लाभ होता है।