नई दिल्ली.अमेरिका और यूरोप मिर्ची की कुछ भारतीय किस्मों के मुरीद हैं। इनमें सबसे आगे राजस्थानी मिर्च ‘ज्वाला’ है जिसके विदेशी दीवानों की कमी नहीं है। यही सौभाग्य पंजाब, हरियाणा के कुछ इलाकों में पैदा होने वाली मिर्च को भी हासिल है।
स्वाद के साथ औषधीय गुण भी:
ज्वाला लाल मिर्च है जिसकी मांग का सबसे बड़ा कारण यह है कि इसमें एक तरह का तेल होता है, जो हृदय को संक्रमण से बचाता है। इसके बीज भी कुछ अन्य रोगों से लड़ने की ताकत देते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूसा (दिल्ली) स्थित केंद्र में ज्वाला विकसित की गई थी।
प्रतिस्पर्धा में आगे:
एसोसिएट चैंबर ऑफ कामर्स (एसोचैम) को उम्मीद है कि 2007-08 में मिर्च का निर्यात दो लाख टन से भी अधिक होगा। अमेरिका व यूरोप के अलावा मलेशिया, बांग्लादेश और चीन भी भारतीय मिर्च के मुरीद हो गए हैं। इन देशों को मिर्च का निर्यात 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। खुद मिर्च के सबसे बड़े उत्पादक चीन ने भारत से 2006-07 में 900 टन से अधिक मिर्च का आयात किया है। भारतीय मिर्च कीमतों की वजह से भी प्रतिस्पर्धा में आगे हैं।
आंध्र नंबर वन :
देशी मिर्च पर एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार, देश में आंध्रप्रदेश मिर्च उत्पादन में सबसे आगे है। इसके बाद कर्नाटक व महाराष्ट्र का नंबर है। जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, पंजाब व हरियाणा के कुछ हिस्सों, उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड में भी मिर्च की खेती का रकबा लगातार बढ़ता जा रहा है।