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Astro Speak Astro Speak ग्रह चाल. बृहस्पति सूर्य का गुरु है। धनु राशि बृहस्पति की अपनी राशि है। लगभग एक वर्ष बृहस्पति एक राशि पर रहता है, इसीलिए 12 वर्ष के अंतराल में पुन:
अपनी उसी राशि में आ पाता है। इस बार 22 नवंबर को बृहस्पति धनु राशि में प्रवेश कर गया एवं 12 दिसंबर को सायं 7.25 पर पश्चिम दिशा में अस्त हो रहा है। 6 जनवरी, 2008 को यह पूर्व दिशा में उदय होगा। 12 वर्ष में एक बार बृहस्पति धनु राशि में अस्त होता है। 7 दिसंबर,1995 को भी बृहस्पति धनु राशि में अस्त हुआ था तथा १ जनवरी,1996 को उदय हुआ था। बारह वर्ष बाद 16 दिसंबर, 2019 को फिर धनु राशि में बृहस्पति अस्त होगा तथा 11 जनवरी, 2020 को उदय होगा।
बृहस्पति शुभ ग्रह माना जाता है। यह सकारात्मक सोच का प्रतीक है तथा बुद्धि का स्वामी एवं धनप्रदाता ग्रह है। बृहस्पति भाग्य का अधिष्ठाता एवं लाभ का कारक भी है। हर मनुष्य को तीन बल की आवश्यकता होती है-पहला देह, दूसरा धन और तीसरा बुद्धि बल। वैसे तो बृहस्पति तीनों का ही कारक है, लेकिन बुद्धि बल का यह विशेष कारक होता है। सूर्य की राशि सिंह है तथा बृहस्पति की धनु एवं मीन। ये दोनों शिष्य-गुरु हैं। गुरु शिष्य के घर या शिष्य गुरु के घर आने पर स्वाभाविक व्यवहार नहीं कर पाते हैं इसीलिए धनु एवं मीन के सूर्य में मलमास रहता है, लेकिन बृहस्पति अपनी राशि में बैठा हो तथा शिष्य सूर्य आकर उसे निस्तेज करता है तब शिष्य से पराजित गुरु व्यथित हो उठता है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदा, भूकंप, तूफान, बेमौसम वष्र, दुर्घटनाएं तथा प्रबुद्धजनों में वैचारिक मतभेद बढ़ने जैसी घटनाएं होती हैं। मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।
बृहस्पति धन, संतान, भाग्य एवं लाभकारक परिस्थितियों का विशेषकारक ग्रह होने के कारण प्राय: संतान चिंता, ऋण चिंता, धनप्राप्ति की चिंता, भाग्योदय की चिंता एवं अपनी मेहनत का सही फल मिलने की चिंता बनाए रखता है। बृहस्पति सभी राशि के लोगों को शुभ रहता है, लेकिन सूर्य के प्रभामंडल में आने के कारण प्राय: यह दु:खी हो जाता है। अपनी राशि में अस्त होने पर यह दु:खी नहीं होता, बल्कि प्रजा एवं शासकवर्ग में बौद्धिक कार्यो को संपन्न कराने की प्रेरणा देता है तथा दुनिया में नए आविष्कार के मार्ग प्रशस्त कराता है। बृहस्पति का अस्त होना बारह राशियों पर विशेष प्रभाव बनाएगा। यद्यपि जन्मकालीन एवं वषर्कालीन ग्रह भी अपने प्रभाव के अनुरूप ही फल प्रदान करेंगे, लेकिन आमतौर पर इसका प्रभाव इस प्रकार रहेगा।
मेष - भाग्योदय के अवसरों में देरी तथा धार्मिक आस्था में वृद्धि कराएगा।
वृष - यात्राओं में कष्ट और पुरानी चिंताओं में कमी आएगी।
मिथुन - जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता, प्रतियोगी परीक्षाओं का भय व व्यापार में रुकावटें।
कर्क - स्वास्थ्य चिंता, अनावश्यक दौड़धूप, दूर के रिश्तों से लाभ व शिक्षा के कारण खर्च।
सिंह - पुरानी योजनाओं में बदलाव, संतान के कैरियर की चिंता, धार्मिक कार्यो में धन खर्च।
कन्या - स्थायी संपत्ति के मामलों की चिंता, बुजुर्ग लोगों को स्वास्थ्य चिंता तथा पारिवारिक सद्भाव में कमी।
तुला - मित्रों एवं रिश्तेदारों से वैचारिक मतभेद, मेहनत करने पर भी फल में देरी, वाहन एवं सुख-सुविधा पर खर्चा।
वृश्चिक - अटके कार्य सुलझने के आसार, आर्थिक चिंता व पारिवारिक सौहाद्र्र में कमी आएगी।
धनु - भावुकतावश लिए पारिवारिक-व्यावसायिक निर्णय चिंताकारक बनेंगे काम में रुकावट संभव।
मकर - लेन-देन में सावधानी रखते हुए भी उलझनें बढ़ सकती हैं। दान-पुण्य करें।
कुंभ - कार्यक्षेत्र में नए बदलाव की संभावना, बुजुर्गो की सलाह लाभकारी।
मीन - राजसम्मान मिलने में देरी संभव, नौकरी एवं व्यापार के नए अवसर मिलेंगे। जल्दबाजी में निर्णय न करें।
गुरु प्राय: सभी को शुभ फल प्रदान करता है। अस्त होने पर शुभ फलों में कमी आती है, लेकिन यदि गुरु गायत्री मंत्र की साधना की जाए तो गुरु सदैव शुभ फल प्रदाता रहेगा। गुरु गायत्री मंत्र इस प्रकार है:
ऊँ अंगिरोजाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि तन्नो गुरु: प्रचोदयात् ।।
इस मंत्र का 108 बार जप गुरु के अस्तगत प्रभाव को नष्ट कर शुभ फल देता है।
हर मनुष्य को तीन बल की आवश्यकता होती है-पहला देह, दूसरा धन और तीसरा बुद्धि बल। वैसे तो बृहस्पति तीनों का ही कारक है, लेकिन बुद्धि बल का यह विशेष कारक माना गया है।