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बीमा व्यवसाय फैलने से ब्रोकरों की चांदी

कोलकाता. बीमा व्यवसाय में मूल्य नियंत्रण खत्म होने (डिटैरिफिंग) के बाद बीमा कंपनियों की प्रतिद्वंद्विता ने ब्रोकरों का कामकाज बढ़ा दिया है। अभी बीमा व्यवसाय में 24 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले ब्रोकरों का कामकाज 55-60 फीसदी तक जा सकता है।

क्या है ब्रोकर
ब्रोकर किसी एक बीमा कंपनी से बंधे नहीं होते। वे एजेंट के मुकाबले व्यापक भूमिका अदा करते हैं। जोखिम प्रबंधन, जांच, प्रीमियम रेटिंग, पॉलिसी चुनने में ग्राहकों की मदद करने और दावे निपटाने में ब्रोकरों की अहम भूमिका होती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि गैरजीवन बीमा में अभी 24 फीसदी व्यवसाय ब्रोकरों के जरिए होता है, जो भविष्य में 55-60 फीसदी तक जा सकता है।

कैसे बढ़ेगा व्यवसाय
आप्टिमा इंश्योरेंस ब्रोकर्स के सीईओ राहुल अग्रवाल का कहना है कि दो-तीन साल में गैर-जीवन बीमा व्यवसाय में ब्रोकरों की हिस्सेदारी 60 फीसदी हो जाएगी। प्रुडेंट इंश्योरेंस ब्रोकर्स के प्रवणजीत धींगरा का कहना है कि मोटर बीमा वितरण के जरिए होता है या रिटेल के जरिए। इसका भी 15-20 फीसदी कारोबार ब्रोकरों के जरिए हो रहा है।

एक लाख रुपए से कम वाले छोटे या मझोले उद्यमों में ब्रोकर की भूमिका बढ़ी नहीं है, लेकिन बाजार में काफी संभावना है। आगे चलकर ब्रोकरों की विशेषज्ञताएं बनेंगी। प्रोपर्टी, मृत्यु, कर्मचारी हित, व्यावसायिक साख, देनदारी, मेडिकल व्यवसाय बड़े क्षेत्र साबित होने वाले हैं।

अग्रवाल ने बताया कि जोखिम का विश्लेषण करने या कितना जोखिम लेना चाहिए जैसे फैसलों में ब्रोकर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।





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