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रुपए की सेहत सुधरी, निर्यातकों की बिगड़ी

rupiya इंदौर: रुपए के मुकाबले डॉलर गिरने से प्रदेश के निर्यातकों को सालाना लगभग 2250 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसमें इंदौर-देवास-पीथमपुर उद्योगों के लगभग 991.5 करोड़ रु. भी शामिल हैं। सालभर में डॉलर 45 से 39 रु. तक गिरा है। अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है अगले छह महीनों में डॉलर 30-32 रुपए तक गिरेगा। ऐसे में यह घाटा दोगुना हो सकता है।

इंडो ओवरसीज चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष जतन गर्ग के मुताबिक प्रदेश से हर साल 15 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट होता है। इसमें इंदौर, पीथमपुर और देवास के सोया, कपड़ा या यान, फार्मा, इंजीनियरिंग पार्ट्स, चमड़ा, लेदर टॉयज उद्योग शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा मार सोया, कपड़ा-यान और चमड़ा उद्योगों पर पड़ रही है। इन उद्योगों से जुड़े उद्योगपतियों का कहना है वे 12-15 प्रतिशत के मार्जिन पर ट्रेड करते थे। उधर, डॉलर 12 प्रतिशत गिरने से लाभांश भी घटा है। श्रम कानून के अधीन नहीं आने का फायदा उठाते हुए सॉफ्टवेअर कंपनियों ने कर्मचारियों को निकालकर ‘कॉस्ट कटिंग’ शुरू कर दी है। टाटा इंटरनेशनल ने जहां उत्पादन लागत में 4 प्रतिशत से ज्यादा कटौती का लक्ष्य रखा है। परेशान उद्योगपतियों का एक दल केंद्रीय उद्योगमंत्री कमलनाथ से मिलकर एक्सपोर्ट्स को टैक्स में छूट दी जाए।हालांकि तीन दिन पहले वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के इस बयान ने फिर सभी को चिंता में डाल दिया है कि अब उद्योगों को इन परिस्थितियों के साथ ही जीना सीखना होगा





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