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स्वर्ण रेखा को नदी बनाने के लिए 31 करोड़ स्वीकृत

ग्वालियर: शहर की खूबसूरती पर ग्रहण बने स्वर्ण रेखा नाले को पुन: नदी बनाने के लिए जल संसाधन विभाग ने काम शुरू कर दिया है। इसके लिए विश्व बैंक ने एक प्रोजेक्ट स्वीकृत कर दिया है।

सीवर के गंदे पानी व कचरे के कारण गंदे, दरुगध युक्त नाले में बदल चुकी नदी कभी शहर की जीवन रेखा हुआ करती थी। अब नदी से बदलकर यह नाला हो चुका है। हनुमान बांध से शुरू होने वाली इस नाले का पानी जलालपुर नहर में जाकर मिलता है।

बाढ़ नियंत्रण योजना के द्वितीय चरण में शासन ने वर्ष 2002 में 17.31 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। इस राशि से स्वर्ण रेखा के तल को पक्का किया जाना था। स्वर्ण रेखा को पानी सप्लाई करने वाले ग्रुप आफ पैलेस डैम्स की मरम्मत व स्वर्ण रेखा के दोनों ओर छह-छह फीट की ऊंची दीवार बनाने सहित अन्य कार्य होने थे। यह कार्य जून 2004 में पूरा होना था लेकिन स्वीकृत राशि के विरुद्ध 20 करोड़ रुपए व्यय हो गए और उक्त कार्यो में से अधिकांश कार्य पूरे नहीं हुए।

जल संसाधन मंत्री अनूप मिश्रा स्वर्ण रेखा में साफ पानी प्रवाहित करा इसमें बोटिंग शुरू कराना चाहते हैं। यह शहर के सौंदर्यीकरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए जल संसाधन विभाग ग्रुप आफ पैलेस डैम की मरम्मत कराने सहित स्वर्ण रेखा के पूर्व के अधूरे कार्य पूरे करने व कुछ नए पुल बनाने जा रहा है। विभाग ने इसके लिए 31 करोड़ रुपए से अधिक का प्रोजेक्ट तैयार कर विश्व बैंक को भेजा था, जिसे विश्व बैंक ने स्वीकृत कर दिया है। विभाग के मुख्य अभियंता राजन श्रीवास्तव का कहना है कि स्वर्ण रेखा के अधूरे कार्यो को पूरा करने सहित अन्य कार्यो के लिए 31 करोड़ रुपए के टेंडर हो चुके हैं। उनका कहना है कि स्वर्ण रेखा में नाव चलेगी और साफ पानी प्रवाहित होगा क्योंकि गंदे पानी का इसमें प्रवेश रोकने के लिए भी इस बार व्यवस्था की गई है।

ये हैं ग्रुप आफ पैलेस डैम्स रायपुर बांध, मामा का बांध, गिरवाई बांध, वीरपुर बांध व हनुमान बांध की गिनती ग्रुप आफ पैलेस डैम्स में होती है। सिंधिया राजवंश के समय बने इन डैमों से स्वर्ण रेखा में पानी आता है। इन डैमों की संरचना इस प्रकार की है कि बरसात में इनमें पानी भर जाता है और फिर वर्ष भर इनका पानी स्वर्ण रेखा में चलता है लेकिन अल्प वर्षा व बांधों के कैचमेंट एरिया पर अतिक्रमण होने के कारण विगत कुछ वर्षो से यह बांध भी पूरे नहीं भर पा रहे हैं।





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